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मिंजर मेला: स्थानीय कलाकारों को मिला मंच, कारोबार रहा पूरी तरह ठप्प

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ऐतिहासिक मिंजर मेले के समापन सामारोह की शोभायत्रा के दौरान भगवान की पालकी उठाये काहर व साथ मे चलत - फोटो : Chamba
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चंबा। कोरोना महामारी के चलते लगातार दूसरी बार प्रभावित हुए मिंजर मेले में इस बार सांस्कृतिक संध्याओं का आयोजन करने में जिला प्रशासन सफल रहा।
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हालांकि, स्टार कलाकारों के बिना ही मिंजर मेले की सांस्कृतिक संध्याएं हुई, लेकिन लोकल कलाकारों ने बिना किसी मेहनताने के मिंजर मेले के मंच पर गीत गाए और एक नई मिसाल पेश की। वहीं, दूसरी ओर करोड़ों का कारोबार करने वाला मिंजर मेला इस बार भी पिछले वर्ष की अपेक्षा शून्य रहा।
चौगान नंबर एक को जहां लोगों की आवाजाही के लिए बंद रखा गया तो वहीं, किसी प्रकार की कोई विशेष मार्केट भी मिंजर मेले में इस बार भी नहीं लग पाई। बहरहाल, कोरोना महामारी के चलते करोड़ों का कारोबार करने वाला मिंजर मेला शून्य में ही सिमट गया।
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इस बार मिंजर मेले की शोभायात्रा में जहां एक सौ लोगों को भाग लेने की अनुमति रही, वहीं दूसरी तरफ गत वर्ष सिर्फ रस्में निभाने वाले लोग ही शोभायात्रा में शामिल हो सके थे। मिंजर मेले में पिछले वर्ष कोई भी सांस्कृतिक संध्या नहीं हो पाई थी, लेकिन इस बार प्रशासन आठ सांस्कृतिक संध्याओं का आयोजन करने में सफल रहा। हालांकि, इसमें कोई बड़ा कलाकार शामिल तो नहीं है, लेकिन स्थानीय कलाकारों को प्रशासन ने अपनी तरफ पूरा मौका दिया, ताकि वे अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकें। गौरतलब है कि मिंजर मेले में कोरोना से पूर्व सांस्कृतिक संध्याओं में नामी कलाकार अपनी आवाज का जादू बिखेरते थे। साथ ही देश के विभिन्न राज्यों से बड़े-बड़े कारोबारी कारोबार के लिए पहुंचते थे। मनोरंजन के साधन भी मेले का प्रमुख आकर्षण रहते थे, लेकिन दो सालों से न तो कारोबार हो पाया है, और न ही मनोरंजन के साधनों की व्यवस्था हो पाई है। कोरोना महामारी ने इस ऐतिहासिक मेले का स्वरूप पूरी तरह बदल दिया है। उम्मीद है कि आगामी वर्ष तक कोरोना का खात्मा होगा और मिंजर मेला अपने पुराने स्वरूप में आयोजित होगा।
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कोरोना के चलते सीमित रहा आयोजन
उपायुक्त चंबा डीसी राणा का कहना है कि प्रशासन ने कोरोना महामारी के बीच मिंजर मेले का आयोजन किया है। कहा कि सांस्कृतिक संध्याओं के माध्यम से स्थानीय कलाकारों को मौका दिया गया। कहा कि कोरोना की तीसरी लहर अभी संभावित है। इसलिए मेले में ज्यादा संसाधन नहीं जुटाए गए।
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