नोटबंदी के बाद वेतन देने की तैयारी कर रहे बैंकों ने चंबा में विशेष रणनीति बना ली है।
सभी बैंक आरबीआई के निर्धारित नियमों को पूरा करते हुए ही निकासी करेंगे। निकासी की नियमित प्रक्रिया में हल्का फेरबदल होगा। बैंकों में पासबुक लेकर पहुंचने वालों के लिए प्रबंधन ने दस हजार तक निकासी की सीमा का निर्धारण किया है। जबकि एटीएम में दो हजार रुपये निकल पाएंगे। लीड बैंक की ओर से किसी भी दूसरे बैंक को नियमित रूप से निर्धारित करेंसी से ज्यादा धनराशि नहीं दी जाएगी।
वेतन हासिल करने के लिए लगने वाली भीड़ के साथ ही लीड बैंक ने नियमित रूप से बैंक आने वालों को भी तवज्जो देने का फैसला किया है। साथ ही लोगों से आह्वान किया है कि वे जरूरत के मुताबिक ही करेंसी बैंकों से निकालें और ज्यादा से ज्यादा कैशलेस प्रणाली का इस्तेमाल करें।
लेन-देन या खरीदारी में डेबिट और क्रेडिट कार्ड को प्रयोग में लाएं। फिलहाल, नोटबंदी के बाद पहली बार बैंक वेतन भुगतान को लेकर चिंतित हैं। साथ ही चिंता इस बात पर भी है कि लोग जरूरत से ज्यादा पैसे बैंकों से निकाल रहे हैं और यह करेंसी वापस बैंकों में नहीं पहुंच रही है। एक सप्ताह में आरबीआई ने 24 हजार रुपये की अधिकतम निकासी नियम लागू किया है। जिन लोगों को इतने पैसों की जरूरत भी नहीं है वे लोग भी बैंकों से निर्धारित रकम को निकलवा रहे हैं। इसके अलावा एटीएम से भी लगातार निकासी जारी है। जिसका असर चंबा पहुंच रही नई करेंसी पर पड़ रहा है।
बैंकों से निकासी के मुकाबले जमा करवाने में 50 प्रतिशत तक की कमी आ गई है। उधर, एसबीआई के प्रबंधक एलआर ठाकुर का कहना है कि वेतन लेेने वाले कर्मचारियों को कैशलेस पर ध्यान देना होगा। कार्ड या चेक से भुगतान करें ताकि करेंसी पर बढ़ता लोढ़ कम हो सके। यदि वेतन हासिल करने वाले कर्मचारी इस फार्मूले पर अमल करते हैं तो उन्हें बैंकों की भीड़ से निजात मिल जाएगी और जरूरतमंद लोग कैश हासिल कर सकेंगे।