मिंजर मेले में कुड नृत्य पेश करने से पहले पारंपरिक वेशभूषा में कलाकार।संवाद
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चंबा। मिंजर मेले में जम्मू का कुड नृत्य आकर्षण का केंद्र रहा। डुग्गर प्रदेश के प्रसिद्ध लोक नृत्य में कुड का बड़ा महत्व है। डुग्गर प्रदेश में कुड नृत्य फसल की कटाई के समय किया जाता है।
ग्रामीण क्षेत्रों में खुुुशी के उपलक्ष्य पर पूरी रात कुड नृत्य होता है। लोग कुलदेवता को नई फसल का भोग लगाते हैं। पारंपरिक वेशभूषा में पीली पगड़ी और सफेद चंगे के साथ कमर पर लाल परना बांध कर कलाकार नृत्य करते हैं। इस दौरान कलाकारों में लय बनाने के लिए ढोल, बांसुरी, केहल छेणा की तान पर कलाकारों द्वारा प्रस्तुत किया जाने वाला नृत्य सभी को मंत्रमुग्ध कर देता है।
60 वर्ष से कुड नृत्य कर रहे मोंगरी उधमपुर के खेम राज कहते हैं कि कुड नृत्य के संरक्षण की जरूरत है। वर्ष 2016 में राष्ट्रपति के हाथों सम्मानित होने वाले खेमराज ने कहा कि युवा पीढ़ी लोक नृत्य से दूर होती जा रही है।
युवाओं को लोक नृत्य से जोड़ने के लिए सरकार को छात्रवृत्ति सहित समेत अन्य पहल करने की जरूरत है। एनजेडसीसी पटियाला के तत्वावधान में मुंबई, खड़कपुर, कोलकता, दमन, दिल्ली, उज्जैन में कुड नृत्य की प्रस्तुतियां कलाकार दे रहे हैं।
मिंजर मेले में कुड नृत्य पेश करने से पहले कलाकार।संवाद- फोटो : Chamba