चंबा के चौगान में बच्चों के साथ कोच। संवाद
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चंबा। युवा पीढ़ी को नशे से बचाने और उन्हें खेलकूद में भविष्य संवारने के लिए जिला फुटबाल एसोसिएशन के महासचिव नरेश खन्ना और कोच प्रेम भूषण हितैषी वर्षों से सेवारत हैं।
दोनों सुबह-शाम बच्चों को निशुल्क फुटबाल की कोचिंग देते हैं। राष्ट्रीय, राज्य और जिलास्तरीय फुटबाल प्रतियोगिताओं के लिए वे जूनियर, सब जूनियर, सीनियर और महिला टीमों में खिलाड़ियों को भेज रहे हैं। नरेश खन्ना और प्रेम भूषण हितैषी अनगिनत बच्चों को फुटबाल सिखाकर सही दिशा दिखाने में कामयाब रहे हैं। उनके अधीन प्रशिक्षण हासिल कर चुके खिलाड़ी राष्ट्रीय, राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं के प्रतिभा दिखाने के साथ-साथ विभागों में भी सेवाएं दे रहे हैं। दोनों गुरुओं के सानिध्य में बच्चे फुटबाल की बारीकियां सीख रहे हैं।
लोक निर्माण विभाग में ग्रेड-वन अधीक्षक रहे नरेश खन्ना ने बताया कि वर्ष 1980 से वह जिला फुटबाल एसोसिएशन के साथ जुड़े हैं। उस दौरान जिला से राज्यस्तरीय फुटबाल प्रतियोगिता के लिए टीमें नहीं मिलती थी। उन्होंने मंडी फुटबाल क्लब की ओर से खेलते हुए वर्ष 1982 में संतोष ट्रॉफी में भाग लिया। उसके बाद उन्होंने दो बार 1985 में चंबा में राज्यस्तरीय फुटबाल प्रतियोगिता आयोजित करवाई। इसमें उनकी टीम रनरअप रही। वर्ष 1991 में सिल्वर जुबली फुटबाल प्रतियोगिता करवाई और विजेता बने। वर्ष 2003 में नार्थ जोन की सब जूनियर फुटबाल प्रतियोगिता आयोजित करवाई। उसके बाद से लगातार बच्चों को फुटबाल सिखाने का क्रम बदस्तूर जारी है।
भारतीय सेना कंपनी हवलदार मेजर रहे राष्ट्रीय खिलाड़ी और फुटबाल कोच प्रेम भूषण हितैषी सेना के जवानों को फुटबाल की बारीकियां सीखाते रहे। 24 वर्ष भारतीय सेना में नौकरी के बसउ वर्ष 2004 में सेना से सेवानिवृत्त हुए। उन्होंने जिला युवा खेल सेवाएं विभाग में बतौर कोच वर्ष 2005 में ज्वाइंन किया। बताया कि अब तक अनगिनत बच्चों को फुटबाल की बारीकियां सीखा चुके हैं। उनके शिष्य खिलाड़ियों में सब जूनियर, जूनियर और सीनियर नेशनल प्रतियोगिता में 60 बच्चे प्रतिभा का जौहर दिखा चुके हैं।
इसमें 29 के करीब लड़कियां भी शामिल हैं। वर्ष 2007 में गोरखपुर में आयोजित राष्ट्रीय फुटबाल प्रतियोगिता में अंडर-21 टीम गई। वर्ष 2006-07 को हल्दवानी में आयोजित लड़कियों की जूनियर वर्ग की प्रतियोगिता में टीम ने भाग लिया। वर्ष 2008-09 को चेन्नई में आयोजित सब जूनियर फुटबाल फेस्टिवल में टीम शामिल रही। वर्ष 2008 में वन विभाग में तैनात हुए। वर्ष 2017 में बतौर डिप्टी रेंजर सेवानिवृत्त हुए। इसके बाद वह बच्चों को फुटबाल की कोचिंग देने में जुटे हैं।