चंबा। सुंदर शिक्षा (परमार्थ) न्यास के तत्वावधान में कला सृजन पाठशाला पंजीकृत ने रामदरश मिश्र के सौंवें जन्म दिवस पर लेख-पाठ और रचना-पाठ का आयोजन किया। उपस्थित सदस्यों ने सरस्वती वंदना के साथ विमला देवी की अगुवाई में दीप प्रज्वलित किया।
शरत शर्मा ने रामदरश मिश्र के साहित्यिक जीवन और व्यक्तिगत जीवन पर प्रकाश डाला। पारुल जसरोटिया ने विद्यार्थी जीवन को लेकर लेख के माध्यम से कई बातें सबके समक्ष रखीं। उन्होंने अध्यात्म पर राय रखते हुए योग की महता और स्वस्थ जीवन शैली के लिए योग के आसान करने पर बल दिया। विमला देवी ने प्रकृति पर रचनाएं पढ़कर सबको मोहित कर दिया। भूपेंद्र जसरोटिया ने चंबियाली कविता मैं बि कताब छपाई अनोखे अंदाज में पढ़कर सबको लोटपोट कर दिया। उन्होंने एक और कविता फूफा हुन्दा रबड़ा साहई पेश कर सबको खूब हंसाया। शरत शर्मा ने स्वयं रचित कविता ध्वस्त होता आदमी का पाठ किया। उन्होंने महत्वपूर्ण समकालीन कवि कुमार कृष्ण की कविता न्याय किधर है का भी पाठ किया। कला सृजन पाठशाला के संरक्षक बालकृष्ण पराशर ने कहा कि एक्टिव तथा पैसिव सदस्यों की संगठन की निर्मिति में आला दर्जे की भूमिका को इग्नोर नहीं किया जा सकता। इसके साथ प्रकृति के सम्मान को तरजीह देने की निष्ठा को सर्वोपरि बताया।