चंबा। भलेई की सरिता ने अपनी रचनात्मक यात्रा रंगोली कला से शुरू की थी, जो कभी उनका शौक था। आज वही धीरे-धीरे उनका जुनून और पहचान बन गई। सरिता ने न सिर्फ रंगोली को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाया बल्कि इस कला को बच्चों और महिलाओं तक पहुंचाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाए।
सरिता से प्रशिक्षण लेने वाले बच्चों ने स्कूल स्तरीय रंगोली प्रतियोगिताओं में बेहतरीन प्रदर्शन किया है। कई बच्चे स्थानीय आयोजनों में भी अपनी कला का प्रभाव छोड़ रहे हैं। सरिता का मानना है कि कला बच्चों में आत्मविश्वास और रचनात्मकता को बढ़ाती है।
रंगोली की कला को अपनाकर सरिता ने खुद को आत्मनिर्भर बनाया और कई महिलाओं को भी प्रशिक्षण देकर उन्हें सशक्त बनाया। उनकी मेहनत और समर्पण यह दर्शाता है कि रचनात्मक क्षेत्रों में भी महिलाओं के लिए अपार संभावनाएं हैं।
सरिता बताती हैं कि उन्होंने घर पर रहते हुए यू-ट्यूब की मदद से नए-नए डिजाइन सीखे और समय के साथ अपनी कला को निखारा। आज वह अपने घर के साथ-साथ पूरे समुदाय में भी सशक्तीकरण की एक सकारात्मक लहर फैला रही हैं।
सरिता का कहना है कि यदि महिलाओं और बच्चों को सही मार्गदर्शन और अवसर मिलें तो वे हर कठिनाई को पार कर अपने जीवन को बेहतर बना सकते हैं। उनकी कहानी इस बात का जीवंत उदाहरण है कि हुनर और लगन से जीवन में नई दिशा और नई ऊर्जा लाई जा सकती है।