चंबा। कोविड काल के दो सालों में मोबाइल पर पढ़ाई और कंप्यूटर पर काम करने से आंखों की रोशनी वाले मरीज बढ़े हैं। कोविड काल में दो सालों तक सरकारी और निजी कार्यालयों में कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम करवाया गया। इसके चलते कर्मचारी सुबह से लेकर शाम तक कंप्यूटर पर डटे रहते थे। यही स्कूल और कॉलेज में पढ़ने वाले बच्चों के साथ हुआ। कोरोनाकाल में बच्चों को मोबाइल पर ऑनलाइन पढ़ाई करवाई गई। कई घंटे तक बच्चे मोबाइल पर ऑनलाइन पढ़ाई करते रहे। इसका सीधा असर उनकी आंखों पर पड़ा। जिले में पिछले दो सालों में आंखों के दस प्रतिशत मरीज बढ़े हैं। इनमें ज्यादातर स्कूली बच्चे और सरकारी कर्मचारी शामिल हैं।
चंबा मेडिकल कॉलेज में रोजाना नेत्र ओपीडी में 20 से 30 किशोर अपने अभिभावकों के साथ आंखों की समस्या को लेकर पहुंच रहे हैं। इसके अलावा वयस्क भी इसी संख्या में अपनी आंखों का इलाज करवाने के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें कई युवा ऐसे भी हैं, जिन्हें पहले ही आंखों की रोशनी की शिकायत थी और चश्मा लगा था। ऐसे में जब कोविड काल में उन्होंने मोबाइल और कंप्यूटर पर ज्यादा समय बिताया तो उनके चश्मे के नंबर बढ़ गए।
एक घंटे की क्लास के बाद दस मिनट करें आराम
डॉक्टरों के मुताबिक आंखों की रोशनी की बीमारी से बचने के लिए ऑनलाइन पढ़ाने करने वाले विद्यार्थियों को एक घंटे की क्लास लगाने के लिए दस मिनट तक अपनी आंखों को आराम देना चाहिए। कंप्यूटर और मोबाइल पर काम करने के बाद बीस सेकेंड तक अपनी आंखें बिल्कुल बंद रखें। इससे आंखों को आराम मिलेगा।
आंखों को रोशनी की बीमारी से बचाने के लिए हरी पत्तेदार सब्जियां, गाजर और संतुलित आहार लेना आवश्यक है। जितना हो सके, कंप्यूटर और मोबाइल पर ज्यादा काम करने से बचें।
नेत्र विशेषज्ञ डॉक्टर आदित्य कश्यप ने बताया कि कोविड काल में आंखों की रोशनी के मामले बढ़े हैं। युवाओं में चश्मों के नंबर भी बढ़े हैं। चंबा मेडिकल कॉलेज में कोविड काल में दस प्रतिशत आंखों की रोशनी वाले मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। ऑनलाइन पढ़ाई और काम करने के कारण यह समस्या हुई है। मरीजों को इससे राहत पाने के लिए जरूरी सुझाव भी दिए जा रहे हैं।