चंबा में किसानों के समर्थन में प्रर्दशन करते विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ता।
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चंबा। किसान विरोधी कृषि कानूनों के खिलाफ सीटू और एसएफआई कार्यकर्ताओं ने संयुक्त रूप से जिला मुख्यालय में प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। एसएफआई जिला कमेटी सदस्य रहमतुल्ला ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार किसानों की मांगों को अनसुना कर रही है। किसान लगातार मांग रहे हैं कि किसान विरोधी कानूनों को वापस लिया जाए। देश की सरकार को आम जनता ने चुना है लेकिन उनकी नीतियां बड़े पूंजीपतियों के हक में हैं। मोदी सरकार लगातार सरकारी उपक्रमों के निजीकरण पर तुली हुई है। जिसका फायदा पूंजीपतियों को मिल रहा है।
उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने शिक्षा बजट में कटौती करके आम जनता पर हमला किया है। इससे शिक्षा और महंगी होगी। आने वाले समय में शिक्षा आम आदमी की पहुंच से दूर हो जाएगी। किसानों के खिलाफ काले कानून आने वाले समय में मोदी सरकार को सत्ता से दूर करने का कारण बनेंगे। किसान विरोधी काले कानून जल्द ही वापस लिए जाएं।
सीटू जिला अध्यक्ष नरेंद्र ने कहा कि भारत के इतिहास में पहली बार दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश में अपनी मांगों को लेकर विरोध कर रहे किसानों के सामने लोहे की कीलें और कंटीले तार लगाकर देश को अंतरराष्ट्रीय पटल पर शर्मिंदा किया है। भाजपा व पूरा संघ परिवार देश में किसान के आंदोलन को बदनाम करने की सबसे घटिया कोशिश कर रहे हैं। कृषि कानून आने से पहले अडानी द्वारा पंजाब में गोदाम बनाने से यह बात साबित होती है कि मोदी सरकार पहले से ही पूंजीपतियों के हक के लिए नीति बना रही थी। अगर सरकार आने वाले समय में ऐसा अड़ियल रवैया बनाए रखती है तो पूरा देश दिल्ली की और कूच करेगा।