होली नाला में निर्माणाधीन सात मेगावाट के बिजली प्रोजेक्ट के लिए अंधाधुंध पेड़ काटे जा रहे हैं। प्रोजेक्ट साइट में कंपनी ने नियमों को अनदेखा कर कई पेड़ों की बलि चढ़ा दी है। लाखों रुपये की वन संपदा को भारी नुकसान पहुंचा है।
कंपनी ने नाले में ही मलबा फेंकना शुरू कर दिया है। जिससे नाला तेजी से भर रहा है और आने वाले दिनों में बाढ़ का खतरा बना हुआ है। मलबा फेंकने की वजह से पेड़ उखड़ गए हैं और डंपिंग साइट में तबदील हो चुका नाला पूरी तरह से भूस्खलन भरा हो चुका है।
जहां थोड़ी सी बारिश में भी स्थानीय लोगों को भारी नुकसान झेलना पड़ सकता है। कंपनी ने होली प्रथम की साइड में भी मक फेंक दिया है। जिस से कभी भी होली प्रथम का बिजली उत्पादन ठप हो सकता है। कुछ पेड़-पौधों को मक में दवा दिया गया है।
मार्किंग से ज्यादा पेड़ काटे जा रहे हैं। ऊपर से जगह-जगह मक फेंकने से पेडों को भारी नुकसान हो रहा है। कहीं पर नाले में मक भर कर नाले का रास्ता ही बदल दिया है। जिस से दूसरी तरफ सारे खडे़ पेड़ बह गए हैं या गिर कर सूख गए हैं। इन सब बातों से संबंधित विभाग कंपनी के खिलाफ कार्रवाई करने से बच रहे हैं।
कंपनी पर कार्रवाई करेगा वन विभाग : आरओ
वन विभाग के खंड अधिकारी लाल चंद ने बताया कि अवैध रूप से नाले में मलबा फेंकने से पेड़ों को नुकसान हुआ है। जिसकी जांच वन विभाग के अधिकारी कर चुके हैं और इसके बदले में कंपनी को नोटिस भेज कर जुर्माना किया गया है। उन्होंने बताया कि इसके बावजूद यदि कंपनी उसी जगह पर दोबारा मलबा फेंक रही है तो वन विभाग सख्त से सख्त कार्रवाई अमल में लाएगा।
वनों को नुकसान की सूचना मिली है : सकलानी
प्रोजेक्ट के महाप्रबंधक संजय सकलानी ने बताया कि वनों को नुकसान होने की सूचना उन्हें मिली है। जिसके बाद वे मौके पर गए हैं। उन्होंने कहा कि प्रोजेक्ट किसी भी सूरत में पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुुंचने दिया जाएगा। सभी कर्मचारियों को हिदायत दी गई है कि वे नियमों का पालन करें।