मेडिकल कॉलेज चंबा में डॉक्टरों की हड़ताल के चलते ओपीडी के बाहर परेशान बैठे मरीज।
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चंबा। चंबा मेडिकल कॉलेज सहित जिले के 57 सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों की ओपीडी में शनिवार को डॉक्टरों की पेन डाउन हड़ताल के तीसरे दिन भी सुबह दो घंटे तक मरीजों के स्वास्थ्य की जांच नहीं हुई। दो घंटे तक सभी चिकित्सक हड़ताल पर रहे। सुबह साढ़े आठ से लेकर साढ़े ग्यारह बजे तक ओपीडी के बाहर मरीज डॉक्टरों का इंतजार करते रहे। काफी देर इंतजार करने के बाद बुजुर्ग वहीं ओपीडी के बाहर जमीन पर बैठ कर चिकित्सकों का इंतजार करते रहे। सुबह साढ़े 11 बजे डॉक्टर पेन डाउन हड़ताल से लौट कर ओपीडी पहुंचे।
बता दें कि मेडिकल कॉलेज की शिशु, महिला, नेत्र और महिला ओपीडी के बाहर तीमारदार अपने मरीजों को लेकर सुबह पहुंच गए। दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले कई मरीजों को डॉक्टर की हड़ताल के बारे में जानकारी नहीं थी। इसके चलते वे ओपीडी के बाहर रूटीन की तरह लाइनों में खड़े हो गए लेकिन, जब दस बजे तक कोई चिकित्सक ओपीडी में नहीं पहुंचा तो उन्होंने प्रबंधन को फोन करना शुरू कर दिया। इस दौरान उन्हें जानकारी दी गई कि डॉक्टर पेन डाउन हड़ताल पर हैं। उसके बाद मरीज और तीमारदार ओपीडी के बाहर जमीन पर चिकित्सक के आने के इंतजार में बैठ गए। साढ़े ग्यारह बजे जैसे ही चिकित्सक अपनी ओपीडी में पहुंचे। उसके बाद मरीजों ने राहत की सांस ली।
वहीं, मेडिकल कॉलेज के आपातकालीन कक्ष में ड्यूटी देने वाले चिकित्सक रूटीन की तरह वहां तैनात रहे। इसकी वजह से इमरजेंसी में आने वाले मरीजों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं हुई। वहीं, डॉक्टर एसोसिएशन का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जातीं, तब तक हड़ताल जारी रहेगी। हड़ताल में फैकल्टी एसोसिएशन और मेडिकल ऑफिसर एसोसिएशन मिलकर विरोध कर रही हैं। फैकल्टी एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉक्टर आदित्य ने बताया कि डॉक्टर सरकार से मांग कर रहे हैं कि पंजाब की तर्ज पर हिमाचल में चिकित्सकों को वेतन दिया जाए। कहा कि चिकित्सक अपनी परवाह किए बगैर लोगों की सेवा के लिए दिन-रात तैनात रहते हैं। ऐसे में सरकार को भी पंजाब की तर्ज पर चिकित्सकों की मुख्य मांगों को पूरा करना चाहिए।
उन्होंने सरकार से मांग की है कि चिकित्सकों को पंजाब वेतन आयोग की तर्ज पर वेतन की लिमिट 2,17,600 से 2,36, 600 की जाए। इसके अलावा चिकित्सकों की पदोन्नति में काफी सीमित विकल्प होने की वजह से एसीपीएस की 4-9-14 की स्कीम को दोबारा शुरू किया जाए। प्रदेश के चिकित्सकों को पंजाब की तर्ज पर पीजी भत्ता दिया जाए। एनपीए को भी 25 प्रतिशत रखा जाए।