चंबा। संत निरंकारी सत्संग भवन मुगला में दिल्ली से आए ज्ञान प्रचारक महात्मा अशोक शास्त्री की अध्यक्षता में सत्संग का आयोजन किया गया। इस दौरान महात्मा अशोक शास्त्री ने अपने प्रवचनों से संगत को भाव-विभौर करते हुए कहा कि परमात्मा को जानने कि इच्छा रखने वाले जिज्ञासु के जीवन में भक्ति की शुरुआत ही ब्रह्मज्ञान के बाद होती है।
जब सदगुरु की कृपा से जिज्ञासु को ब्रह्मज्ञान हासिल हो जाता है तो उसके सारे भ्रम मिट जाते हैं। वह यह जान लेता है कि जिस परमात्मा को वह कई विधियों से पाने कि कोशिश कर रहा था, सब व्यर्थ साबित हुई। परमात्मा को सिर्फ ओर सिर्फ सतगुरु कि शरण में निष्काम भाव से प्राप्त किया जा सकता है। मीडिया सहायक संत निरंकारी विनोद कुमार ने बताया कि सत्संग का शुभारंभ आरती वंदना से किया गया। इस मौके पर डलहौजी, बनीखेत, साहो, जडेरा, राख, जांघी, मैहला और मंगला आदि क्षेत्रों से लोग पहुंचे। संत महात्माओं ने सदगुरु माता सुदीक्षा की शिक्षाओं को अपने विचारों और भजनों द्वारा व्यक्त किया।