चंबा से मनिमहेश के लिये रवाना होती दशनामी अखाड़े की छड़ी। संवाद
चंबा। मणिमहेश यात्रा की परंपरा के तहत रविवार को दशनामी जूना अखाड़ा चंबा से छड़ी यात्रा विधिवत पूजा-अर्चना के बाद रवाना हुई। इस अवसर पर उपमंडलाधिकारी (नागरिक) प्रियांशु खाती और दशनामी अखाड़ा के महंत यतिंद्र गिरि ने पूजा-अर्चना कर छड़ी को आगे बढ़ाया। बैंड-बाजों, शंखनाद और हर-हर महादेव के जयकारों के बीच साधु-संतों की टोलियों के साथ यह पवित्र छड़ी यात्रा मणिमहेश झील की ओर रवाना हुई। मार्ग में जगह-जगह श्रद्धालु साधु-संतों का आशीर्वाद लेने पहुंचे। छड़ी यात्रा छह दिनों तक विभिन्न पड़ावों पर रुकते हुए 30 अगस्त की शाम को पवित्र मणिमहेश डल झील पहुंचेगी। 31 अगस्त को राधाष्टमी के दिन झील में पवित्र स्नान के उपरांत यात्रा वापस अखाड़े लौटेगी।
छड़ी यात्रा का कार्यक्रम
24 अगस्त : रात्रि विश्राम श्री राधाकृष्ण मंदिर जुलाहकड़ी
25 अगस्त : प्रस्थान कर शाम को राख में विश्राम
26 अगस्त : पड़ाव दुर्गेठी
इसके बाद यात्रा भरमौर, हड़सर और धनछो होते हुए 30 अगस्त को मणिमहेश झील पहुंचेगी।
धार्मिक महत्व
दशनामी छड़ी को भगवान शंकर का अंश माना जाता है। इसका महत्व उतना ही है, जितना अमरनाथ यात्रा की दशनामी छड़ी का। रियासतकाल से यह परंपरा चंबा स्थित दशनामी अखाड़ा निभाता आ रहा है। इस यात्रा में देशभर से आए साधु-संत भाग लेते हैं और इसे श्रद्धालु अपार आस्था से जोड़ते हैं।