चामुंडा मंदिर में धीमी गति से चल रहे कार्य पर पुरातत्व विभाग ने पुजारी को घेर लिया है। विभाग का कहना है कि पुजारी की धमकियों से डरकर काम में लगे मजदूर और मिस्त्री भाग गए हैं।
मंदिर में काम प्राचीन शैली में हो रहा है और हिमाचल में इस शैली के कामगार विभाग को नहीं मिले थे। जिसके बाद विभाग ने राजस्थान से विशेष तौर पर कामगार बुलाए थे। यह कामगार न सिर्फ चामुंडा मंदिर बल्कि भरमौर के चौरासी मंदिर में भी काम कर रहे हैं लेकिन भरमौर में विभाग को किसी तरह की दिक्कत नहीं आई। जबकि चामुंडा मंदिर में पुुजारी अपने तरीके से काम पूरा करवाना चाहता था और उसने कामगारों पर अनावश्यक दबाव डाला। जिसकी वजह से कामगार अधूरा काम छोड़कर भाग गए।
पुरातत्व विभाग के वरिष्ठ संरक्षक सहायक जीए गनेई ने बताया कि चामुंडा मंदिर गिरने की कगार पर पहुंच गया था। इस वजह से पुरातत्व विभाग ने इसका प्रस्ताव बनाकर भेजा था। बजट की मंजूरी मिलते ही काम शुरू कर दिया गया। यदि काम में कोई अड़चन न डलती तो अप्रैल माह की शुरूआत तक काम पूरा हो जाता। चामुंडा माता का मंदिर पुरातत्व विभाग के अधीन है और विभाग अपने तरीके से ही इस मंदिर का काम करवाएगा। उन्होंने कहा कि पुरातत्व विभाग के कामगार भाग चुके हैं अब यदि काम जल्द पूरा करवाना है तो मंदिर के पुजारी को ही कामगारों का प्रबंध करना होगा।