चमेरा चरण तीन के विस्थापितों ने उप तहसील कार्यालय धरवाला के बाहर धरना प्रदर्शन किया। उसके बाद विस्थापितों ने तहसीलदार के माध्यम से मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह को एक ज्ञापन भी भेजा।
जिप सदस्य ललित ठाकुर ने बताया कि चमेरा जल विद्युत परियोजना तीन की सर्ज सॉफ्ट की टनल से वर्ष 2012 में पानी का रिसाव हुआ था। जिससे मौखरी, सुगाड़ी, चूड़ी पुल व डाकखाना गांव पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। जिसके कारण गांव के लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा। उन्होंने कहा कि विस्थापितों को एनएचपीसी द्वारा मात्र दो कमरों का किराया देकर अपना पल्ला झाड़ा जा रहा है। जबकि ग्रामीणों को अपने मवेशी व घरेलू सामान रखने के लिए कोई स्थान नहीं बचा है। जिन लोगों की दुकानें पानी के रिसाव से बर्बाद हुई हैं, उन लोगों का रोजगार बंद हो चुका है।
एनएचपीसी द्वारा उन लोगों को कोई भी राहत प्रदान नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2012 में विस्थापित परिवार के एक सदस्य को अस्थाई रोजगार दिया गया था। उन्हें भी नौकरी से निकाल दिया गया है। जिसके कारण प्रभावित परिवार दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हो गए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से मांग की है कि चमेरा तीन के विस्थापितों को उचित मुआवजे के साथ परिवार के सदस्य को एनएचपीसी में नौकरी मुहैया करवाई जाए।
इसके अलावा विस्थापित परिवारों को मकान बनाने के लिए जमीन तथा दुकान के बदले दुकान दी जाए। उन्होंने कहा कि 24 घंटे के अंदर उनकी मांगे पूरी नहीं हुई तो शुक्रवार को विस्थापित उपतहसील कार्यालय धरवाला में क्रमिक भूख हड़ताल शुरू करेंगे। इस मौके पर राकेश शर्मा, श्रवण कुमार, देवी लाल, मुंशी राम, सुनील कुमार, चीनो देवी, ओम प्रकाश, सुरेश शर्मा, कौशल्या, संजीव कुमार, राज सिंह और प्यार सिंह मौजूद रहे।