एसीएस के साथ बैठक में चर्चा हुई कि प्रदेश में पुनर्वास कार्यों के लिए मानदंडों में बदलाव बेहद जरूरी है। आपदा की दृष्टि से प्रदेश के संवेदनशील क्षेत्रों को चिह्नित करने के साथ-साथ अग्रिम भविष्यवाणी की तकनीक पर काम करना होगा। पंत ने केंद्रीय जल आयोग से प्रदेश में बाढ़ पूर्वानुमान इकाई स्थापित करने, हाइड्रोलॉजिकल निगरानी बढ़ाने समेत ग्लेशियर झीलों के अध्ययन की आवश्यकताओं पर बल दिया है। केंद्रीय टीम ने कहा कि बाढ़, भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाएं घटित हो रही हैं, ऐसे में भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) से इस दिशा में भी कार्य किया जा सकता है।