उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाना, अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण, आतंकवाद और नक्सलवाद के खिलाफ कार्रवाई जैसे कार्य मजबूत नेतृत्व का परिणाम हैं। वैश्विक मंच पर भारत का सम्मान बढ़ा है और देश विनिर्माण का बड़ा केंद्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि 2047 तक भारत को आत्मनिर्भर और विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प आगे बढ़ रहा है। इससे पहले उन्होंने कार्यकर्ताओं के साथ प्रधानमंत्री का संबोधन भी सुना। कार्यक्रम में सांसद कंगना रणौत, पूर्व मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर, पूर्व सांसद महेश्वर सिंह, विधायक सुरेंद्र शौरी, लोकेंद्र कुमार, दीपराज, जिलाध्यक्ष अमित सूद, नरोतम ठाकुर मौजूद रहे।
हार के बाद कांग्रेस को चुनाव आयोग क्यों दिखता है: श्रीकांत
भाजपा प्रदेश प्रभारी श्रीकांत शर्मा ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कांग्रेस पर पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का राजनीतिक सिद्धांत अब ऐसा हो गया है कि चुनाव जीतने पर जनादेश लोकतंत्र की जीत होता है और चुनाव हारने पर चुनाव आयोग कटघरे में खड़ा कर दिया जाता है। उन्होंने कांग्रेस से सवाल किया कि यदि चुनावी हार के लिए मुख्य चुनाव आयुक्त से इस्तीफा मांगा जा सकता है, तो हिमाचल में लगातार चुनावी झटकों के बाद मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू से इस्तीफा क्यों नहीं मांगा जाता। कांग्रेस को अपने दोहरे मापदंड का जवाब देना चाहिए। उन्होंने हिमाचल के हालिया नगर निगम और जिला परिषद चुनाव का उदाहरण देते हुए कहा कि प्रदेश में कांग्रेस की सरकार होने के बावजूद उसे ईवीएम और बैलेट पेपर, दोनों चुनावों में जनता के प्रतिकूल परिणाम का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि 2026 में हुए मंडी, धर्मशाला, सोलन और पालमपुर नगर निगम चुनावों में भाजपा ने तीन नगर निगमों में जीत हासिल की, जबकि कांग्रेस को केवल पालमपुर में सफलता मिली। 63 वार्डों में ईवीएम से हुए मतदान में भाजपा ने 37 और कांग्रेस ने 23 वार्ड जीते, जबकि तीन वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशी विजयी रहे। भाजपा प्रदेश प्रभारी ने कांग्रेस नेतृत्व से सवाल पूछा कि जब प्रदेश में सरकार कांग्रेस की है, मुख्यमंत्री कांग्रेस के हैं और चुनाव राज्य निर्वाचन आयोग के तहत हुए, तो ईवीएम से हुए चार नगर निगम चुनाव में कांग्रेस को तीन जगह हार क्यों मिली।
चुनाव आयोग को घेरना कांग्रेस की राजनीति: कश्यप
भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और सांसद सुरेश कश्यप ने कहा कि कांग्रेस की राजनीति अब सुविधा के लोकतंत्र पर आधारित हो गई है। जब चुनावी नतीजे उसके पक्ष में आते हैं तो चुनाव आयोग निष्पक्ष दिखाई देता है, लेकिन हार मिलने पर वही संस्था सवालों के घेरे में खड़ी कर दी जाती है। लगातार मिल रही चुनावी पराजयों की जिम्मेदारी स्वीकार करने के बजाय कांग्रेस संवैधानिक संस्थाओं को दोषी ठहराने का प्रयास कर रही है। बुधवार को कांग्रेस की ओर से लोकभवन शिमला के बाहर किए गए प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया देते हुए सांसद सुरेश कश्यप ने कहा कि मई 2026 में हुए चार नगर निगम चुनाव में भाजपा ने तीन पर जीत दर्ज की, जबकि कांग्रेस केवल पालमपुर में ही जीत हासिल कर सकी। ऐसे में कांग्रेस को स्पष्ट करना चाहिए कि क्या इन चुनाव में भी वह अपनी हार के लिए चुनाव आयोग को जिम्मेदार मानती है। मतदाता सूची सत्यापन प्रक्रिया को लेकर कश्यप ने कहा कि निष्पक्ष चुनाव के लिए मतदाता सूची का शुद्ध और अद्यतन होना जरूरी है। कांग्रेस को यह स्पष्ट करना चाहिए कि वह इस प्रक्रिया का विरोध क्यों कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस राजनीतिक लाभ के लिए लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता को कमजोर करने का प्रयास कर रही है।