संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। घुमारवीं थाना में दर्ज मारपीट, हत्या के प्रयास, धमकी और एससी-एसटी एक्ट से जुड़े मामले में विशेष न्यायाधीश बिलासपुर की अदालत ने आरोपी विशाल चंदेल को जमानत दे दी है। अदालत ने कहा कि आरोपी 22 जुलाई से न्यायिक हिरासत में है और मामले की जांच लगभग पूरी हो चुकी है। आरोपी से अब किसी तरह की बरामदगी भी नहीं होनी है। अदालत ने यह भी माना कि मामले के गवाहों के बयानों में विशाल चंदेल का नाम तो है, लेकिन घटना में उसकी स्पष्ट भूमिका सामने नहीं आती।
घुमारवीं थाना में 7 जून 2026 को दर्ज मामले में शिकायतकर्ता पक्ष ने आरोप लगाया था कि हवाण बाजार के पास कुछ लोगों ने उनका रास्ता रोककर वाहनों से बाहर निकाला और उनके साथ मारपीट की। अभियोजन के अनुसार, मौके पर कई लोग मौजूद थे और कुछ के हाथों में डंडे थे। व्यक्ति को पकड़कर सड़क किनारे नाले की ओर फेंकने और शिकायतकर्ता पक्ष को धमकाने का भी आरोप लगाया गया था। दो लोगों को धार्मिक स्थल की ओर ले जाकर वहां कथित तौर पर अपमानित करने की बात भी पुलिस जांच में सामने आई थी।
जांच के दौरान पुलिस ने घायलों के मेडिकल करवाए और घटनास्थल का निरीक्षण कर फोटो और वीडियोग्राफी की। पुलिस ने घटना से संबंधित वाहन, क्षतिग्रस्त मोबाइल फोन और वीडियो फुटेज समेत अन्य साक्ष्य भी कब्जे में लिए। अभियोजन ने जांच के दौरान हत्या की नीयत से उकसाने और जान से मारने की धमकी देने के आरोप भी लगाए थे।
विशाल चंदेल की ओर से दलील दी गई कि वह निर्दोष है और उसे मामले में झूठा फंसाया गया है। उसका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है और घटना में उसकी सक्रिय भूमिका दर्शाने वाली कोई स्पष्ट सामग्री नहीं है। बचाव पक्ष ने सह आरोपी राधे श्याम को हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट से 7 सितंबर को मिली जमानत का हवाला देते हुए समानता के आधार पर राहत मांगी। विशेष अदालत ने आदेश में कहा कि गवाहों के बयानों में विशाल का नाम जरूर है, लेकिन मौके पर उसने क्या भूमिका निभाई, यह स्पष्ट नहीं है। उसके खिलाफ हत्या के प्रयास के लिए उकसाने या एससी-एसटी एक्ट से जुड़े अपराध में भी पर्याप्त सामग्री सामने नहीं आई है। अदालत ने यह भी माना कि आरोपी पहला अपराधी है और उसके खिलाफ कोई पूर्व आपराधिक मामला दर्ज होना सामने नहीं आया है। अदालत ने कहा कि जांच लगभग पूरी हो चुकी है और आरोपी स्थानीय निवासी है, इसलिए उसके फरार होने की आशंका भी नहीं है। इन परिस्थितियों में उसे आगे न्यायिक हिरासत में रखने का कोई उद्देश्य नहीं है। अदालत ने एक लाख रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि के एक जमानती पर जमानत मंजूर की। आरोपी को जांच में सहयोग करने, हर तारीख पर अदालत में पेश होने और गवाहों को प्रभावित या धमकाने से दूर रहने की शर्त लगाई गई है।