सीएचसी स्वारघाट, पीएचसी टोबा और बैहल फार्मासिस्ट के सहारे
तीनों स्वास्थ्य केंद्रों पर 30 हजार की आबादी निर्भर
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। उपमंडल श्री नयनादेवी जी के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र स्वारघाट, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र टोबा और बैहल बिना चिकित्सक के चल रहे हैं। यह अस्पताल फार्मासिस्ट के सहारे हैं। इन अस्पतालों पर करीब 30 हजार आबादी निर्भर है। तीनों अस्पतालों में डॉक्टरों के एक-एक पद स्वीकृत हैं।
सीएचसी स्वारघाट पुराने चंडीगढ़-मनाली हाईवे किनारे है। यहां से हर रोज हजारों वाहन गुजरते हैं। स्वारघाट उपमंडल का मुख्यालय भी है। यहां एसडीएम श्री नयनादेवी जी का कार्यालय, पुलिस थाना सहित कई सरकारी कार्यालय हैं। इसके अलावा यहां बड़ा बाजार और हजारों की आबादी है। इसको देखते हुए सीएचसी स्वारघाट में डॉक्टरों के सभी पद भरे होने चाहिए थे, लेकिन विपरीत इसके यह अस्पताल मात्र फार्मासिस्ट के सहारे चल रहा है।
दो महीने सीएचसी स्वारघाट में यही हालात बने हुए हैं। दो माह पहले यहां तैनात एक मात्र चिकित्सक पोस्ट ग्रेजुएट की पढ़ाई करने चली गईं। उपमंडल स्वारघाट और उपमंडल नालागढ़ के पहाड़ी इलाकों के तहत आने वाली कई पंचायतों की ग्रामीण सीएचसी स्वारघाट में इलाज के लिए आते हैं। चिकित्सक नहीं होने से उन्हें निजी क्लीनिकों का रुख करना पड़ रहा है। चंडीगढ़-मनाली नेशनल हाईवे पर कोई न कोई सड़क दुर्घटना होने पर घायलों को समय पर इलाज नहीं मिल पाता है। ऐसे हालात में घायलों को नालागढ़, बिलासपुर के अस्पतालों में पहुंचाना पड़ता है।
दूसरी ओर पंजाब सीमा के पास स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र टोबा और बैहल भी बिना चिकित्सक के चल रहे हैं। इन क्षेत्रों के लोगों को सर्दी, बुखार जैसे छोटी बीमारी के लिए सीमावर्ती पंजाब के स्वास्थ्य केंद्रों में जाना पड़ रहा है। पीएचसी टोबा में हाल ही एक चिकित्सक की नियुक्ति भी की गई थी, लेकिन बाद उनकी तैनाती के आदेश भी बाद में रद्द कर दिए।
सीएचसी स्वारघाट, पीएचसी बैहल और टोबा में चिकित्सकों के पद खाली हैं। खाली पदों की जानकारी उच्च अधिकारियों को दे दी गई है। निदेशालय के आदेश पर रिक्त पदों को भरा जाएगा।
-डॉ. सुरिंदर सिंह बावा, स्वास्थ्य खंड अधिकारी, श्री नयना देवी जी