- ग्रामीण युवाओं के कार्य की कर रहे सराहना
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। बिलासपुर शहर के साथ लगती बंदला धार में युवाओं ने पुरानी परंपराओं को संजोने का बीड़ा उठाया है। मक्की की फसल आने के बाद दिवाली से पहले गांव में तुप्पू (लोक गायन) गाने की बहुत पुरानी परंपरा है, जो विलुप्त हो गई है। देर शाम युवा ढोलक उठाकर गांव के हर घर में जाते हैं और तुप्पू का गायन करते हैं। यह सिलसिला आठ दिनों तक चलता है।
युवाओं का कहना है कि कुछ साल पहले गांव में यह परंपरा बंद हो गई थी। अब इसकी दोबारा शुरुआत की है। बुजुर्गों के मार्गदर्शन से इन युवाओं ने इस परंपरा को जीवंत कर दिया। इनमें से अधिकतर युवा कॉलेज और आईटीआई में पढ़ने वाले हैं। उनका कहना है कि जब वह छोटे थे तो गांव के बड़े युवाओं साथ इस परंपरा को निभाते थे, लेकिन आधुनिकता का इस पर भी प्रभाव पड़ा, लेकिन एक बार फिर उन्होंने इसकी शुरुआत की है। गांव के लोग भी इन युवाओं की खूब सराहना कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि गांवों में पुराने समय से यह परंपरा चली आ रही थी। दिवाली से कुछ दिन पहले यह गायन शुरू होता था। गांव के युवा शाम के समय इकट्ठा होकर हर घर में जाते हैं और तुप्पू गाते हैं। कुछ साल से यह गायन बिल्कुल बंद हो चुका था। क्योंकि आज की युवा पीढ़ी इन परंपराओं को भूलती जा रही थी। अब इन युवाओं ने फिर से इसे शुरू कर बहुत अच्छा कार्य किया है। यह युवा गावों के सामाजिक कार्यों में भी बढ़-चढ़कर भाग लेते हैं। इसमें इन युवाओं के साथ गांव के छोटे बच्चे भी भाग लेते हैं, जिससे वह भी आगामी समय में इसे आगे बढ़ाएंगे। सोशल मीडिया पर भी लोग इसे खूब पसंद कर रहे हैं। इसमें धीरज, राहुल, रोहित गौरव, लक्की, काकू, कार्तिक और शामिल है।