-श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर में भागवत कथा आयोजित
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन पंडित भास्करानंद शर्मा ने भगवान श्रीकृष्ण के हाथों कंस के उद्धार का प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि जब कंस के पाप बढ़ गए तो वह भयभीत हो गया।
शिशु रूप कान्हा को मारने के लिए कंस ने कागासुर, बकासुर और पूतना जैसे राक्षसों को भेजा, लेकिन कान्हा ने उनका वध कर दिया। कंस ने अपने षड्यंत्र की पूर्ति करते एक मल युद्ध रखा, जिसमें आसपास के इलाके के पहलवानों को सादर आमंत्रित किया। कृष्ण और बलराम ने जब सबसे पहले शिव धनुष तोड़ा तो कंस का भय और बढ़ गया। कंस को मालूम था कि जो इस धनुष को तोड़ेगा वही उसका काल बनेगा। इन दोनों नौनिहालों ने कंस के सभी योद्धाओं को मार दिया। इसी दौरान एक कुबलिया पीड़ हाथी जिसको मदिरापान करवाया गया था, को भी कान्हा से लड़ने के लिए भेजा। इस दोनों भ्राताओं ने इस मदमस्त हाथी को पूंछ से पकड़कर आसमान में फेंक दिया। इस दौरान भगवान श्रीकृष्ण ने एक छलांग लगाई। कंस को पकड़ा और भूमि पर पटक दिया। उन्होंने कंस को बालों से पकड़ा तो वह मृत्यु नजदीक देख जीवन की भिक्षा मांगने लगा। तब भगवान कृष्ण ने कहा कि जिसे वह पकड़ लेते हैं उसका वह उद्धार करके ही छोड़ते हैं। भगवान ने कहा कि जिस प्रकार मामा आपने मेरे मां को केसों से पकड़कर उन्हें यातनाएं दी थी तो आपको भी उन्हीं यातनाओं से गुजरना होगा। भगवान ने एक मुष्टिका के प्रहार से कंस को प्राण मुक्त कर दिया। भास्करानंद शर्मा ने बताया कि पापी कितना भी बलशाली क्यों न हो उसके पापों का अंत अवश्य होता है। कथा समापन पर भजन कीर्तन का आयोजन भी किया गया और बाद में प्रसाद भी बांटा गया।