मंजूरी और बजट के बावजूद निर्माण कार्य अटका
नैण गुजरां स्कूल की हालत भी खराब, अधूरी स्वीकृति पर सवाल
कई स्कूलों में मलबा और जर्जर ढांचा बना खतरा
विधायक त्रिलोक जमवाल विधानसभा में उठा चुके मुद्दा
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। मोरसिंघी पंचायत में वर्ष 2023 की आपदा में पूरी तरह क्षतिग्रस्त हुए प्राइमरी स्कूल कसोल का निर्माण कार्य अब तक शुरू नहीं हो पाया है। इसके चलते बच्चों को असुरक्षित और असुविधाजनक स्थानों पर पढ़ाई करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
स्कूल दो अलग-अलग रिहायशी मकानों के कमरों में चल रहा है। इससे विद्यार्थियों और शिक्षकों दोनों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। लोगों ने बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए चार बिस्वा भूमि दान में दी थी, लेकिन अधिकारियों ने इसे अपर्याप्त बताकर मंजूरी नहीं दी। वहीं, सरकार की ओर से करीब 25 लाख रुपये की स्वीकृति मिलने के बावजूद भवन निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है।
इसी तरह बल्हचुराणी पंचायत के प्राइमरी स्कूल नैण गुजरां की स्थिति भी चिंताजनक है। दो कमरों वाले इस स्कूल का एक कमरा आपदा में गिर चुका है, जबकि निर्माण के लिए केवल ढाई लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। ऐसे में अधूरी स्वीकृति को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
इसके अलावा सीनियर सेकेंडरी स्कूल मल्यावर और चलैहली के प्रांगण में आपदा के दौरान गिरे मलबे को अब तक नहीं हटाया गया है, जिससे विद्यार्थियों की सुरक्षा पर खतरा बना हुआ है। वहीं कंदरौर स्कूल में छत टपकने की समस्या भी पढ़ाई को प्रभावित कर रही है।
सदर विधानसभा क्षेत्र के विधायक त्रिलोक जमवाल ने कहा कि इस मुद्दे को विधानसभा में उठाया गया है। उन्होंने बताया कि शिक्षा क्षेत्र में इन देरी और अव्यवस्थाओं के कारण बच्चों को सुरक्षित और बेहतर शैक्षणिक वातावरण नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने अधिकारियों से आग्रह किया है कि उपलब्ध भूमि और स्वीकृत बजट के अनुसार जल्द ड्राइंग तैयार कर निर्माण कार्य शुरू किया जाए। साथ ही अन्य प्रभावित स्कूलों में मलबा हटाने और मरम्मत कार्य को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने की आवश्यकता जताई।