पंजीयक सहकारी सभाएं 17–18 फरवरी को करेंगी चार की जमीन नीलामी
150 ऋणियों पर विभाग की नजर, पिछली नीलामी खरीदार न मिलने से रही विफल
गबन के मुख्य मामले में विभागीय कार्रवाई पूरी, पर कानूनी अड़चन फंसी
पूर्व सचिव व प्रबंध समिति पर 34 करोड़ का अवार्ड,अपीलीय प्राधिकरण में मामला लंबित
3500 से अधिक खाताधारकों का 20–25 करोड़ रुपये का डिपॉजिट अब भी फंसा
सरोज पाठक
बिलासपुर। सहकारी सभा सीमित तलाई में वर्ष 2018 में उजागर हुए बहुचर्चित घोटाले को लेकर सहकारिता विभाग ने डिफॉल्टरों के खिलाफ वसूली की प्रक्रिया जारी शुरू की है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार सोसायटी में करीब 150 ऐसे डिफॉल्टर ऋणी हैं, जिनसे लगभग 20 करोड़ रुपये की वसूली की जानी है। इसी क्रम में इस माह 17 और 18 फरवरी को चार डिफॉल्टरों की जमीन नीलामी की जाएगी।
विभाग से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि वसूली की प्रक्रिया के तहत पिछले महीने भी शाहतलाई के घराण में दो डिफॉल्टरों की संपत्ति की नीलामी रखी गई थी, लेकिन उस समय कोई खरीदार सामने नहीं आया, जिसके चलते संपत्तियां नहीं बिक सकीं। इसके बाद विभाग ने दोबारा नीलामी प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लिया है। तलाई सहकारी सभा में सामने आए गबन के मुख्य मामले को लेकर सहकारिता विभाग की ओर से पूर्व सचिव और पिछली प्रबंध समिति के खिलाफ लगभग 34 करोड़ रुपये का अवार्ड (वसूली आदेश/जुर्माना) पारित किया जा चुका है। हालांकि यह मामला फिलहाल शिमला स्थित अपीलीय प्राधिकरण के समक्ष विचाराधीन है। अपील लंबित होने के कारण अवार्ड पर अंतिम कार्रवाई और वास्तविक वसूली अभी तक शुरू नहीं हो पाई है।
विभागीय आंकड़ों के अनुसार तलाई सहकारी सभा पर कुल देनदारी काफी बड़ी है। खाताधारकों का लगभग 20 से 25 करोड़ रुपये का डिपॉजिट अभी भी फंसा हुआ है। इस सोसायटी से हजारों की संख्या में सदस्य जुड़े हुए हैं, जिनकी मेहनत की जमा पूंजी वर्षों से अटकी पड़ी है। बताते दें कि तलाई सहकारी सभा में वर्ष 2018 में करीब 34 करोड़ रुपये के गबन का मामला सामने आया था, जो बाद में बढ़कर लगभग 40 करोड़ रुपये के पार तक पहुंच गया। इसके बाद सहकारिता विभाग ने 16 मार्च 2019 को तलाई थाना में इस संबंध में एफआईआर दर्ज करवाई थी। बाद में यह मामला प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) शिमला को भी सौंपा गया, लेकिन खाताधारकों का आरोप है कि जांच की गति बेहद धीमी रही और अब तक कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया। खाताधारकों और संघर्ष समिति की ओर से लगातार यह सवाल उठाया जा रहा है कि जब तलाई सहकारी सभा का हर वर्ष सहकारिता विभाग के ऑडिटरों द्वारा ऑडिट होता रहा, तो फिर इतने बड़े पैमाने पर गबन कैसे हो गया। समिति का कहना है कि विभागीय निगरानी में गंभीर खामियां रहीं। उधर, तलाई सहकारी सभा के खाताधारकों की ओर से गठित संघर्ष समिति पहले ही यह साफ कर चुकी है कि यदि जमा राशि लौटाने और दोषियों पर कार्रवाई में तेजी नहीं लाई गई, तो प्रदेश उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर की जाएगी। समिति का आरोप है कि वर्षों बीत जाने के बावजूद खाताधारकों को उनकी मेहनत की कमाई लौटाने को लेकर कोई स्पष्ट रोडमैप नहीं दिया गया है। संवाद
कोट
तलाई सहकारी सभा में डिफॉल्टर ऋणियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई लगातार चल रही है। करीब 150 ऐसे ऋणी चिह्नित किए गए हैं, जिनसे लगभग 20 करोड़ रुपये की वसूली की जानी है। पिछले महीने दो डिफॉल्टरों की संपत्ति नीलाम करने का प्रयास किया गया था, लेकिन खरीदार न मिलने से नीलामी सफल नहीं हो सकी। अब इसी माह 17 और 18 तारीख को चार अन्य डिफॉल्टरों की जमीन नीलामी की प्रक्रिया तय की गई है।
भास्कर कालिया, पंजीयक सहकारी सभाएं बिलासपुर