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Bilaspur News: एमबीए पास सूरज जल्द जाने वाला था दुबई, बनना था पिता का सहारा

Sat, 10 Jan 2026 11:11 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
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सड़क हादसे में जान गंवाने वाले सूरज का अंतिम संस्कार
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सैकड़ों लोगों ने नम आंखों से दी अपने लाडले को विदाई
पिता की बस में परिचालक बनकर करता था काम
बहन को लाल जोड़े में देखने के सपने रह गए अधूरे
धार्मिक और मिलनसार स्वभाव के कारण हर दिल में थी जगह

नीरज महाजन
भराड़ी (बिलासपुर)। भराड़ी थाना क्षेत्र के तहत घंडालवीं कस्बे में शुक्रवार शाम स्कूटी और बाइक की टक्कर में जान गंवाने वाले युवक का शनिवार को अंतिम संस्कार कर दिया गया। 23 वर्षीय सूरज की अंतिम यात्रा में सैकड़ों लोग शामिल हुए। हर आंख नम थी और माहौल गमगीन रहा। सूरज की असमय मौत से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है।
सूरज जल्द ही दुबई जाने वाला था। विदेश जाने से जुड़े सभी दस्तावेज तैयार हो चुके थे । अचानक हुई इस अनहोनी ने परिवार की खुशियों को मातम में बदल दिया। सूरज परिवार की जिम्मेदारियों को भली-भांति समझता था और विदेश जाने से पहले पिता का सहारा बनना चाहता था। सूरज के दोस्तों के अनुसार, वह विदेश जाकर मेहनत से पैसा कमाना चाहता था ताकि अपनी बड़ी बहन की शादी धूमधाम से कर सके। इसी लक्ष्य को लेकर उसने पढ़ाई पूरी की और आगे बढ़ने की तैयारी कर रहा था। उसके घर में माता-पिता, बहन और बुजुर्ग दादी हैं। इस हादसे ने पूरे परिवार को झकझोर कर रख दिया है। सूरज ने एमबीए की पढ़ाई पूरी कर ली थी और इन दिनों वह पिता के साथ उनके काम में हाथ बंटा रहा था। सूरज के पिता के पास निजी बस है, जो लदरौर–जाहु–चंदेश रूट पर चलती है। सूरज रोजाना पिता के साथ बस पर जाता और परिचालक के तौर पर काम कर शाम को घर लौटता था, लेकिन शुक्रवार की शाम उसके जीवन की आखिरी शाम साबित हुई।
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दोस्तों का कहना है कि सूरज अपने सपनों को लेकर बेहद गंभीर और मेहनती था। बताया जा रहा है कि सूरज धार्मिक विचारों वाला युवक था। उसके दादा के बनवाए गए घर के पास मंदिर में वह रोज सुबह छह बजे स्नान के बाद पूजा-अर्चना करता था। गांव में किसी के भी सुख-दुख में शामिल होना उसकी आदत थी। मदद के लिए वह हमेशा तत्पर रहता था। जिस रूट पर उनके पिता की बस चलती थी, वहां के लोग भी सूरज के स्वभाव से बेहद प्रभावित थे। उसकी मददगार और अपनत्व भरी सोच के कारण लोग उसे खास मानते थे। अंतिम संस्कार में गांव के लोगों के साथ उस रूट के सैकड़ों लोग भी शामिल हुए। दोस्तों का कहना है कि आज के समय में सूरज जैसा ईमानदार, मिलनसार और धार्मिक युवक मिलना मुश्किल है। नाम की तरह ही उसका जीवन भी उज्ज्वल था। कम उम्र में दुनिया से विदा होकर वह परिवार और मित्रों को ऐसा दर्द दे गया, जो जीवन भर नहीं भर पाएगा। संवाद
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