- बजट आने वाले वर्षों के साथ सरकार के घोषणा पत्र की रूपरेखा करता है तय
-बोले, किसी एक जिले पर फोकस करने से नहीं होगा विश्वस्तरीय पर्यटन ढांचा खड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। झंडूता के विधायक जीतराम कटवाल ने कहा कि बजट आने वाले वर्षों के साथ ही सरकार के घोषणा पत्र की रूपरेखा तय करता है, लेकिन यह ऊंची दुकान-फीका पकवान जैसा ही साबित हुआ। इसका प्रचार किसी बड़े अखाड़े के दंगल की तरह किया गया था, लेकिन यह छोटे बच्चों की कुश्ती जैसा ही निकला। एक साल में एक लाख युवाओं को रोजगार की गारंटी देने वाली इस सरकार की असलियत यह है कि राजीव गांधी रोजगार योजना के तहत आवेदन करने वाले 222 बेरोजगारों में से अभी एक भी युवा को नौकरी नहीं मिली है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री 20 हजार पदों के लिए इसी माह विज्ञापन जारी करने की बात जरूर कर रहे हैं, लेकिन आने वाले दिनों में आचार संहिता लागू हो जाने का बहाना बनाकर इससे भी पल्ला झाड़ लिया जाएगा। अप्रैल-मई में इम्तिहान होने वाले हैं। उसके परिणाम निश्चित तौर पर सरकार की आंखें खोल देंगे।
बजट अभिभाषण पर चर्चा के दौरान जीतराम कटवाल ने 15-15 लाख रुपये को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सवाल उठाने वाले सत्ता पक्ष पर पलटवार भी किया। उन्होंने कहा कि चर्चा घोषणा पत्र के आधार पर होनी चाहिए। भाजपा के घोषणा पत्र में ऐसी कोई गारंटी नहीं थी। वह अपनी बात समझाने का एक तरीका था, जिसके परिणाम सबके सामने हैं। कहा कि सरकार का अब तक का कार्यकाल अगर-मगर करके गारंटियों पर लोगों को उलझाने में ही बीत गया।
उन्होंने कहा कि सरकार विश्वस्तरीय पर्यटन ढांचा खड़ा करने की बात कर रही है, लेकिन यह किसी एक जिले पर फोकस करने से नहीं होगा। हर क्षेत्र में पर्यटन विकास की संभावना है। सरकार ने 11 वॉल्वो, 35 इलेक्ट्रिकल तथा 210 अन्य बसों के साथ ही कई अन्य वाहन खरीदने की बात कही है। झंडूता विधानसभा क्षेत्र में एचआरटीसी के 5 रूट बंद कर दिए गए हैं। इससे स्कूली बच्चों को निशुल्क बस सुविधा बेमानी साबित हो रही है। उन्होंने बिलासपुर से ताल्लुक रखने वाले तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि उन्हें मंत्री बनाने की पैरवी उन्होंने भी की थी, लेकिन वह उन्हीं के पीछे पड़ गए हैं। झंडूता विधानसभा क्षेत्र में पानी की कमी होने के बावजूद वह रुकमणी कुंड का पानी अपने विधानसभा क्षेत्र में ले जाने पर आमादा हो गए हैं। उन्होंने धर्माणी को सलाह दी कि मंत्री होने के नाते वह छोटे झगड़ों में न पड़ें, अन्यथा वह संकट में फंस सकते हैं।