बिलासपुर। सदर उपमंडल के मंगरोट गांव में राष्ट्रीय राजमार्ग शिमला-मटौर की भूमि पर अपना दावा करने वाले व्यक्ति को प्रशासन ने निशानदेही के लिए 1 से 5 अप्रैल तक का समय दिया है। सदर तहसीलदार ने सोमवार को क्षेत्रीय कानूनगो देवली को लिखित आदेश जारी किए हैं। आदेश के अनुसार 5 अप्रैल तक रिपोर्ट कार्यालय में देनी होगी।
सोमवार को राजमार्ग की भूमि पर दावा करने वाले राजनकांत को सदर तहसीलदार कार्यालय में बुलाया गया। इस मुद्दे पर राजनकांत से बात की गई। तहसीलदार ने कानूनगो को आदेश जारी किए कि रिपोर्ट में विवादित भूमि की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करें। बताया जाए कि मौका पर वादी और प्रतिवादी के पास कितना-कितना रकबा है। राजस्व रिकार्ड में वादी और प्रतिवादी का कितना हिस्सा बनता है। बता दें कि राजनकांत ने दावा किया कि मंगरोट में जिस जगह पर उसने खोखा रखा है। वहां पर उसकी खसरा नंबर 217/119 में उसके माता के नाम पर 15 बिस्वा जमीन है लेकिन मौके पर करीब 12 बिस्वा जमीन ही निकल रही है। इस खसरा नंबर की निशानदेही उसकी माता ने साल 2009 में कराई थी। उस समय उनकी करीब तीन बिस्वा जमीन कम निकली थी। उस समय से वे अपनी जमीन की निशानदेही की मांग कर रहे हैं लेकिन प्रशासन निशानदेही देने से बच रहा है।
बता दें कि पिछले साल दिसंबर माह में उच्च न्यायालय के आदेश पर मंगरोट में राजमार्ग के किनारे से राजनकांत के खोखे को हटाया गया था। इसके बाद से यह भूमि विवाद शुरू हो गया। राजनकांत ने तब भी सड़क पर खोखा लगा दिया था। 10 मार्च को भी राजनकांत ने सड़क पर चूल्हा जलाकर चाय बनाई थी।