भागवत कथा के शुभारंभ पर उमड़ा भक्ति का सैलाब
संवाद न्यूज एजेंसी
शाहतलाई (बिलासपुर)। भगवान श्री हरि विष्णु की आराधना और भक्ति के रंगों से सराबोर शाहतलाई नगरी में श्रीमदभागवत कथा का शुभारंभ हुआ। नगर पंचायत तलाई के वार्ड नंबर-2 स्थित वैद्यनाथ समिति की ओर से आयोजित कथा का प्रारंभ मुख्य मंदिर तलाई बाजार में हुआ, जहां भागवत और आचार्य प्रमोद पुंज का स्वागत किया गया।
कलश यात्रा के साथ आरंभ हुई इस धार्मिक श्रृंखला में महिलाओं ने सिर पर कलश धारण कर मंगल गीत गाए। वातावरण शंख, घंटियों और बैंड-बाजों की ध्वनि से गूंज उठा। फूल-मालाओं से सजे पंडाल में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। पहले दिन के प्रवचन में कथावाचक आचार्य प्रमोद पुंज ने बताया कि श्रीमद्भागवत कथा का मूल स्वरूप स्वयं ब्रह्माजी ने अपने पुत्र नारद मुनि को सुनाया था। बाद में यह महर्षि वेदव्यास और उनके पुत्र शुकदेव के माध्यम से राजा परीक्षित तक पहुंची। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत में भगवान श्रीकृष्ण के स्वधाम गमन से पूर्व उनके दिव्य तेज के इसमें समाहित होने का भी वर्णन मिलता है। श्रीमद्भागवत महापुराण भक्ति, ज्ञान और मोक्ष का अद्भुत संगम है, जो भगवान श्रीकृष्ण को सर्वोच्च देवता के रूप में प्रस्तुत करता है। उन्होंने कहा कि कथा सुनने से मनुष्य को यह बोध होता है कि ईश्वर की शरण में जाकर ही वास्तविक शांति और मुक्ति प्राप्त की जा सकती है। पहले दिन भागवत महात्म्य और सच्चिदानंद रूपाय श्लोक की व्याख्या की गई, जिसमें ईश्वर की स्तुति और संसार की उत्पत्ति का उल्लेख हुआ। इस दौरान राजा परीक्षित को ऋषि पुत्र द्वारा दिए गए श्राप और उनके मोक्ष से जुड़े प्रसंगों का भी भावपूर्ण वर्णन हुआ। आचार्य प्रमोद पुंज ने श्रोताओं को धुंधकारी की कथा सुनाते हुए कहा कि भागवत कथा का श्रवण इतना प्रभावशाली है कि यह पापों का नाश कर, सबसे नीच व्यक्ति को भी मोक्ष प्रदान कर सकती है।