- तकनीकी शिक्षा, स्किल डेवलपमेंट के प्रति बच्चों ,युवाओं को शिक्षित करना समय की मांग
-महिला सशक्तिकरण का अर्थ बेहतर समाज की स्थापना करना
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। सुनियोजित और व्यवस्थित विकास की संकल्पना की पूर्ति के लिए चुने हुए प्रतिनिधियों कि भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह बात मंत्री राजेश धर्माणी ने भारतीय संसदीय संस्थान, जनसंख्या एवं विकास नई दिल्ली द्वारा पर्यटन परिसर औहर में स्वास्थ्य,महिला सशक्तिकरण और अन्य संबंधित मुद्दों में पंचायती राज संस्थाओं की भूमिका विषय पर संवेदीकरण कार्यशाला के उद्घाटन अवसर पर यह कही।
उन्होंने कहा कि समाज को आर्थिक तौर पर सशक्त बनाने के लिए तकनीकी शिक्षा, स्किल डेवलपमेंट के प्रति बच्चों ,युवाओं को शिक्षित करना समय की मांग है। शिक्षा में गुणवत्ता लाना यह वर्तमान समाज की बहुत बड़ी आवश्यकता है। सामाजिक मुद्दों पर लोगों को जानकारी व जागरूकता प्रदान करना चुने हुए प्रतिनिधियों का अधिकार है। इसके लिए सकारात्मक माहौल बनाकर आगे बढ़ें। कहा कि महिला सशक्तिकरण का अर्थ बेहतर समाज की स्थापना करना है। सबके अधिकारों की रक्षा करना ही वास्तव में राम राज्य है, प्रत्येक व्यक्ति की न्यूनतम जरूरत को पूरा करने से ही समाज में शांति व भाईचारा रखा जा सकता है। कहा कि हिमाचल में शिक्षा, स्वास्थ्य व अन्य क्षेत्रों में प्रगति अवश्य हुई है, लेकिन हमें गुणवत्ता की ओर ध्यान देना होगा। उन्होंने संवेदीकरण कार्यशाला के लिए घुमारवीं का चयन करने के लिए आयोजकों का आभार व्यक्त किया। कहा कि इस कार्यशाला के माध्यम से चुने हुए प्रतिनिधियों विशेष रूप से पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधियों को लाभ मिलेगा। उन्होंने बिलासपुर क्षेत्र के विकास के लिए चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं का भी इस दौरान जिक्र किया।
भारतीय संसदीय संस्थान जनसंख्या एवं विकास नई दिल्ली के सचिव मनमोहन शर्मा ने कहा कि संस्था जनसंख्या स्थिरीकरण कार्यक्रम की सफलता के लिए छोटे परिवारों के आदर्श मानकों को आम जनता की सहमति के लिए रूपरेखा प्रदान कर स्वास्थ्य, शिक्षा ,महिला सशक्तिकरण, रोजगार एवं सामाजिक, पर्यावरणीय नीतियों के अनुसार कार्य कर रही है। संस्था द्वारा न केवल इन मानकों पर भारत अपितु विश्व के 50 अन्य देशों में भी कार्य किया जा रहा है। पूर्व निदेशक भारतीय जनसंचार संस्थान नई दिल्ली डॉक्टर जेएस यादव ने स्वास्थ्य सेवा में सुधार के लिए सहायता एक जीत की स्थिति विषय पर विचार साझा किया। कहा कि जन प्रतिनिधि संचार व्यवस्था के आदर्श माने जाते हैं। जनसंख्या पर नियंत्रण व अन्य मामलों के संबंध में चुने हुए प्रतिनिधि लोगों के बीच जाकर उन्हें जानकारी व जागरूकता प्रदान करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। जिला परिषद सदस्य प्रमिला बसु ने कहा कि अधिक से अधिक चुने हुए प्रतिनिधियों को ऐसी कार्यशाला में भाग लेना चाहिए। लोगों तक इन विचारों को पहुंचाने के लिए सहयोग प्रदान करना चाहिए। पूर्व विधायक तिलक राज शर्मा ने भी लोगों को संबोधित किया। जिला सांख्यिकी कार्यालय बिलासपुर के डॉ. सुशील कुमार ने जिला बिलासपुर की स्वास्थ्य संकेतक विषय पर अपनी प्रस्तुति दी। कार्यक्रम के दौरान जिला परिषद अध्यक्ष विमला, उपाध्यक्ष मानसिंह धीमान, अन्य सदस्यों के अतिरिक्त जिले के पंचायती राज संस्थाओं के विभिन्न स्तरों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
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