गट्टी में नौ दिवसीय श्रीराम चरितमानस कथा का आयोजन
कथा में भरत मिलाप प्रसंग सुन भावुक हुए श्रद्धालु
संवाद न्यूज एजेंसी
बरठीं (बिलासपुर)। राधे श्याम कथा कमेटी गट्टी की ओर से आयोजित नौ दिवसीय श्रीराम चरितमानस कथा के सातवें दिन कथा व्यास पंडित राधा रमण शास्त्री ने भरत मिलाप और श्रीराम के वनवास प्रसंग का मार्मिक वर्णन किया। कथा सुनाते हुए उन्होंने कहा कि राम नाम ही हम सबकी नैया भवसागर से पार लगाने वाला है, इसलिए युवावस्था से ही भगवान श्री राम के नाम का जाप करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि राम का कार्य करते रहना चाहिए, जो राम का नहीं, वह किसी काम का नहीं। शास्त्री ने कहा कि रावण की सेना में काम, क्रोध, लोभ, ईष्र्या और अशांति है जबकि राम की सेना में प्रेम, शांति, संतोष और वैभव है। इसलिए हर व्यक्ति को राम की सेना में रहना चाहिए। जब भरत ननिहाल से लौटे तो सीधे माता कैकेयी और श्रीराम को खोजते हुए महल पहुंचे। वहां उन्हें ज्ञात हुआ कि श्रीराम, सीता और लक्ष्मण 14 वर्ष के वनवास पर जा चुके हैं। यह सुन भरत विलाप करने लगे और माता कैकेयी को धिक्कार ते हुए स्वयं को दोषी मानने लगे। राजा दशरथ के निधन के बाद भरत ने अंतिम संस्कार कर श्री राम को वापस लाने का संकल्प लिया और माताओं और प्रजाजनों के साथ चित्रकूट पहुंचे। जहां भरत ने श्रीराम के चरणों में गिरकर अयोध्या लौटने की प्रार्थना की लेकिन श्रीराम ने पिता के वचन की मर्यादा निभाने की बात कही। अंत में भरत श्री राम की चरण पादुका लेकर अयोध्या लौटे और 14 वर्षों तक उन्हें सिंहासन पर स्थापित कर स्वयं तपस्वी जीवन जीते हुए राजपाट संभाला। महाआरती के साथ प्रसंग संपन्न हुआ। समिति ने बताया कि कथा का समापन 26 अप्रैल को विशाल भंडारे के साथ होगा। इस अवसर पर समिति प्रधान मुकेश शर्मा, अभिषेक,आदर्श, अनिल, जीवन, नवीन, कुलदीप, नंदकिशोर, श्यामलाल, नितेश, संजीव, अशोक, रामपाल सहित अन्य ग्रामीण मौजूद रहे।