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इस बार प्रदेश में पांच साल बाद सत्ता परिवर्तन का बदलेगा इतिहास : धर्माणी

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मछुआरों के लिए 150 रुपये की रॉयल्टी घटाकर 10 रुपये की, नाव पर 70 और जाल पर 90 फीसदी सब्सिडी
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एक हजार रुपये की मछली पकड़ने पर पहले देनी पड़ती थी 150 रुपये रॉयल्टी, अब टोकन अमाउंट के तौर पर 10 रुपये
गोबिंद सागर झील के किनारे सोलर रेहड़ियों का प्रावधान, मछुआरों और बेरोजगारों को देने की पैरवी
झील किनारे पर्यटन बढ़ाकर बढ़ाए जाएंगे रोजगार के अवसर

संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। धराड़सानी में मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के कार्यक्रम में तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने मछुआरा समुदाय के लिए सरकार की ओर से किए गए फैसलों को प्रमुखता से गिनाया। हिमाचल में हर पांच साल बाद सरकार बदलने की परंपरा रही है, लेकिन इस बार यह इतिहास बदलेगा। सुक्खू सरकार के कार्यों को जनता समझ रही है और इस बार सरकार दोबारा सत्ता में आएगी। उन्होंने कहा कि समाज के किसी भी वंचित वर्ग को विकास की किरण से दूर नहीं रहने दिया जाएगा और व्यवस्था परिवर्तन के जरिए लोगों के जीवन में बदलाव लाने का काम जारी रहेगा।
उन्होंने कहा कि गोबिंद सागर झील में मत्स्य पालन शुरू होने के बाद पहली बार मछुआरों के कल्याण को लेकर गंभीरता से सोचा गया है। सरकार ने मछली पकड़ने पर लगने वाली रॉयल्टी में बड़ी कटौती कर मछुआरों को सीधा आर्थिक लाभ पहुंचाया है। पहले एक हजार रुपये की मछली पकड़ने पर 150 रुपये रॉयल्टी देनी पड़ती थी, जिसे घटाकर अब महज 10 रुपये कर दिया गया है। इससे मछुआरों को प्रति हजार रुपये की मछली पर 140 रुपये का सीधा लाभ होगा। धर्माणी ने कहा कि साल में दो महीने मछली पकड़ने पर प्रतिबंध रहता है। इस दौरान मछुआरों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाता है। मछुआरा समुदाय के प्रतिनिधिमंडल से मुख्यमंत्री की मुलाकात के दौरान जब यह समस्या सामने आई तो सरकार ने इस दिशा में तत्काल निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य सत्ता सुख नहीं बल्कि व्यवस्था परिवर्तन है और व्यवस्था परिवर्तन का अर्थ समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के जीवन में सुधार लाना है। कहा कि मछुआरों के लिए 3500 रुपये की सब्सिडी योजना भी शुरू की जा रही है। नाव खरीदने पर 70 फीसदी और नेट यानी जाल पर 90 फीसदी सब्सिडी देने का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा डीप फ्रीजर उपलब्ध करवाने और जरूरत के अनुसार मोटरसाइकिल देने जैसी योजनाओं का भी उन्होंने उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में मछुआरा समुदाय के लिए और भी कल्याणकारी योजनाएं लाई जाएंगी। धर्माणी ने कहा कि कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन के कारण बिलासपुर आने वाले पर्यटकों की संख्या और बढ़ेगी। मंडी भराड़ी के पास पहुंचते ही पर्यटकों को गोबिंद सागर झील का विशाल जल क्षेत्र दिखाई देता है। ऐसे में झील को पर्यटन गतिविधियों से जोड़कर स्थानीय लोगों की आजीविका के अवसर बढ़ाए जा सकते हैं। पर्यटकों को कुछ समय बिलासपुर में रोकना जरूरी है, ताकि इसका सीधा फायदा स्थानीय लोगों और मछुआरा समुदाय को मिल सके। कहा कि झील के आसपास छोटी-छोटी रेहड़ियां लगाने की व्यवस्था पर भी काम किया जा रहा है। सोलर पैनल से संचालित इन रेहड़ियों में बिजली की समस्या भी नहीं रहेगी। उन्होंने कहा कि ऐसी सुविधाएं मछुआरा समुदाय के साथ बेरोजगार युवाओं को भी उपलब्ध करवाई जानी चाहिए, ताकि वे पर्यटन गतिविधियों के माध्यम से अपनी आय का साधन तैयार कर सकें। धर्माणी ने कहा कि सरकार औहर में भी पर्यटन स्थल विकसित कर रही है और मंडी भराड़ी को भी विकसित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य मनाली और लेह-लद्दाख की ओर जाने वाले पर्यटकों को बिलासपुर में कुछ समय ठहरने के लिए आकर्षित करना है। यदि पर्यटक यहां रुकेंगे तो होटल, ढाबे, छोटी दुकानें, रेहड़ियां और स्थानीय उत्पादों से जुड़े कारोबार को बढ़ावा मिलेगा और इससे मछुआरों समेत स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
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मुख्यमंत्री के समक्ष रखा भाखड़ा विस्थापितों का मुद्दा
मंत्री धर्माणी ने कहा कि बिलासपुर विस्थापितों का जिला है। भाखड़ा बांध के निर्माण के दौरान विस्थापित हुए सैकड़ों परिवारों को आज भी प्लॉट नहीं मिले हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि पौंग बांध विस्थापितों के लिए फॉरेस्ट राइट्स एक्ट के तहत जिस तरह प्रक्रिया शुरू हुई है, उसी तर्ज पर भाखड़ा बांध विस्थापितों को भी इसका लाभ दिया जाए। उन्होंने कहा कि भाखड़ा विस्थापितों में बड़ी संख्या में मछुआरा परिवार भी शामिल हैं और इनके हितों का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। धर्माणी ने किसाऊ बांध परियोजना का जिक्र करते हुए कहा कि परियोजनाओं पर सहमति देने से पहले हिमाचल के हितों को देखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने इस परियोजना को लेकर पहले हिमाचल को होने वाले लाभ की बात रखी और इसके परिणामस्वरूप प्रदेश को परियोजना से सालाना करीब 600 करोड़ रुपये की आय का प्रावधान हुआ है। उन्होंने इसे प्रदेश के हितों की रक्षा के लिए सरकार की इच्छाशक्ति बताया।
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