बिजली की समस्या से परेशान हैं 53 गांवों के लोग
खजुरिया। भीषण गर्मी में अघोषित बिजली कटौती से ग्रामीण बहुत परेशान हो गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बिजली कटौती में अगर जल्दी कोई सुधार नहीं हुआ तो बेगमाबाद बिजलीघर पर धरना प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे।
बेगमाबाद बिजलीघर के अंतर्गत करीब 53 गांव आते हैं। जिन गांवों की आबादी लगभग एक लाख से भी अधिक है। उपभोक्ता बिजली कटौती से बहुत परेशान हो गए हैं। रात और दिन लगाकर 24 घंटों में मुश्किल से मात्र आठ घंटे ही उपभोक्ताओं को बिजली मिल रही है। ग्रामीणों का रात में तो बड़ा बुरा हाल हो गया है। रात को बिजली मुश्किल से दो घंटे के लिए आती है और वह भी रात को एक बजे आती है और दो घंटे रुककर चली जाती है। ऐसे में ग्रामीणों का सोना भी दूभर हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि बिजली कटौती इसी तरह से होती रही तो सभी ग्रामीण बेगमाबाद बिजलीघर पर धरना प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे।
बिजलीघर के जेई भास्कर गुप्ता का कहना है कि बिजली की स्थिति हमारे बिजली घर से गड़बड़ नहीं है, बल्कि बिजली के कंट्रोल रूम से ही रोस्टिंग की जा रही है। इसमें बिजली घर बेगमाबाद के कर्मचारियों का कोई दोष नहीं है। यह सिस्टम ऊपर से ही है। इसमें वह कुछ नहीं कर सकते।
हमारे गांव में बिजली की बहुत बुरी स्थिति है। दिन में तो हम लोग पेड़ों के नीचे बैचठकर अपना टाइम काट लेते हैं। लेकिन, रात को बिजली न आने से हम लोगों की नींद भी पूरी नहीं हो पाती।
-रामपाल मौर्या, ग्राम अहरो
इस भयंकर गर्मी में बिजली बहुत कम आ रही ह ै। रात और दिन में बड़ी मुश्किल से चार घंटे ही बिजली मिल रही है। जिससे हम लोग बहुत ही परेशान हैं। फसलें भी खेतों में सूख रहीं हैं।
-सुखविंदर सिंह, ग्राम महतोष
हमारे गांव में बिजली की बहुत ही बुरी स्थिति हो गई है। चौबीस घंटों में मुश्किल से पांच घंटे ही बिजली आ रही है। बिजली न आने के कारण हमारे गांव के लोग भीषण गर्मी से बहुत परेशान हैं।
-शाहिद हुसैन, ग्राम टेहरी ख्वाजा
हमारे यहां बिजली की बहुत बड़ी परेशानी है। बिजली हमारे गांव में न के बराबर कभी-कभी आती है। जिसके कारण गर्मी से हम लोगों का बहुत बुरा हाल हो गया है।
-नईम अहमद, ग्राम उधमपुर
बिजली हमारे यहां थोड़ी थोड़ी देर के लिए आती है। और वह भी बहुत मुश्किल से चार घंटे ही आ रही है। बिजली बहुत कम आने को लेकर गांव के लोग बहुत परेशान हैं। खेतों की सिंचाई भी बिजली के अभाव में नहीं हो पा रही है।
-नरेंद्र कुमार गंगवार, ग्राम कनकपुर की गौंटिया