बरठीं (बिलासपुर)। प्रदेश की बहुचर्चित 33 करोड़ से ज्यादा का गोलमाल करने वाली सहकारी सभा तलाई में छत ग्राम सेवा सहकारी सभा भेड़ाघाट ने नियमों को ताक पर रखकर एक करोड़ की राशि जमा करवाई है। इस मामले पर सहायक पंजीयक सहकारी सभाएं बिलासपुर ने शिकायत मिलने के बाद कड़ा संज्ञान लिया है। आदेश जारी किए हैं कि यदि तलाई सहकारी सभा से छत प्रबंध समिति ने जमा राशि वापस नहीं ली तो वर्ष 2014 की प्रबंधन समिति और सचिव से लोगों के पैसों की वसूली की जाएगी।
सहकारी सभा तलाई के सचिव ने नियमों को ताक पर रखकर 15 सहकारी सभाओं के लगभग 19 करोड़ रुपये जमा किए हैं। ज्यादा ब्याज के लालच में 15 सभाओं के सचिवों ने प्रबंधन समिति को बहला फुसलाकर करोड़ों रुपये सहकारी सभा तलाई में जमा करवाया है जो सरासर नियमों के खिलाफ है। ऐसा ही मामला छत ग्राम सेवा सहकारी सभा भेड़ाघाट में सामने आया है। तत्कालीन प्रबंधन समिति ने सभा के उपप्रधान नंदलाल रतन की अध्यक्षता में 4 जनवरी 2014 को बैठक कर प्रस्ताव पारित किया था कि 11.50 प्रतिशत ब्याज पर एक करोड़ की एफडीआर 3 वर्षों के लिए तलाई ग्राम सेवा सहकारी सभा तलाई में जमा करवाई जाए। इसके लिए सभा के सीसीएल खाता संख्या 12350 600015 से पैसे निकालकर 11.50 प्रतिशत ब्याज पर एफडीआर बनवा दी जाए। सभा के एक सदस्य बालचंद शारदा ने इस प्रस्ताव का विरोध किया और हस्ताक्षर भी नहीं किए। इसके बावजूद एक करोड़ रुपये ज्यादा ब्याज के लालच में सहकारी सभा तलाई में जमा करवा दिए गए। 7 वर्ष बीत जाने के बावजूद अभी तक यह राशि वापस नहीं आई है। इसकी शिकायत सभा के पूर्व प्रधान जगदीश कुमार, पूर्व उपप्रधान बलबीर सिंह ठाकुर, जोगिंद्र सिंह, पूर्व कोषाध्यक्ष विनय शर्मा, बालचंद शारदा, परमजीत सिंह, कंचना कुमारी, कुलदीप सिंह, अनूप सिंह, कुलदीप सिंह, राजकुमार, उर्मिला देवी, रमेश कुमार, कश्मीर सिंह सहित अन्य लोगों ने अप्रैल 2021 को सहायक पंजीयक सहकारी सभाएं बिलासपुर को शिकायत पत्र दिया था कि उक्त मामले की छानबीन कर कार्रवाई की जाए। इस पर विभाग ने कड़ा संज्ञान लिया है। लोगों ने बताया कि नियमों को ताक पर रखकर एक करोड़ रुपये दूसरी सोसायटी में जमा करवा दिया गया।
उधर, सहायक पंजीयक सहकारी सभाएं बिलासपुर राकेश कुमार ने बताया कि शिकायत आई है। पत्र संख्या 686 के तहत सहकारी सभा भेड़ाघाट के सचिव को उचित कार्रवाई करने के आदेश जारी किए थे। पत्र संख्या 927 के तहत आदेश जारी किए हैं कि सहकारी सभा तलाई से पैसा वापस लिया जाए अन्यथा सहकारी सभा की तत्कालीन प्रबंध समिति को पैसे की भरपाई करनी पड़ेगी। उन्होंने इस अफवाह को भी सिरे से खारिज कर दिया कि सहकारी सभा तलाई के आरोपियों को विभाग ने क्लीन चिट दे दी है। उन्होंने कहा कि धारा 69-1 के तहत हिमाचल प्रदेश सहकारी सभाएं अधिनियम 1968 के एक्ट नंबर 3-1969 के तहत छानबीन की जा रही है। लोगों के पैसे का दुरुपयोग करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।