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Bilaspur News: परंपरागत खेती छोड़ मशरूम को बनाया कमाई का जरिया, हर साल कमा रहे लाखों

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जगदीश वर्मा ने उगाई मशरूम। संवाद
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2009 से मशरूम उगा रहे पराहु के जगदीश, सरकारी योजनाओं से मिली आर्थिक मदद ने बढ़ाया कारोबार
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संवाद न्यूज एजेंसी
गेहड़वीं (बिलासपुर)। झंडूता उपमंडल की ग्राम पंचायत बलघाड़ के पराहु गांव निवासी किसान जगदीश वर्मा ने परंपरागत खेती से अलग हटकर मशरूम उत्पादन को अपनी आजीविका का साधन बनाया है। वर्ष 2009 से मशरूम की खेती कर रहे जगदीश अब हर साल लाखों रुपये की आय अर्जित कर रहे हैं। उनकी सफलता क्षेत्र के दूसरे किसानों के लिए भी प्रेरणा बनी है।
जगदीश ने वर्ष 2009 में बटन मशरूम की खेती शुरू की थी। वर्ष 2017 में उन्होंने इसे बड़े स्तर पर शुरू किया। इसके बाद बटन मशरूम के साथ शिटाके मशरूम का उत्पादन भी किया। अब तक वह कई क्विंटल मशरूम का उत्पादन कर बाजार में बेच चुके हैं और इससे अच्छी आय अर्जित कर रहे हैं। मशरूम उत्पादन को विस्तार देने में सरकारी योजनाओं का भी उन्हें लाभ मिला। एकीकृत बागवानी विकास मिशन के तहत वर्ष 2017-18 में उन्हें करीब आठ लाख रुपये की सहायता मिली। इसके बाद आरकेवीवाई-रफ्तार योजना के तहत वर्ष 2021-22 में करीब 20 लाख रुपये की आर्थिक मदद मिली। इस सहायता से उन्होंने मशरूम उत्पादन के लिए जरूरी ढांचा विकसित किया और इसे बड़े स्तर पर आगे बढ़ाया। जगदीश का कहना है कि मशरूम की खेती कम जगह में भी की जा सकती है। अन्य फसलों की तुलना में इसमें अच्छी आय की संभावना है। आज लोगों में मशरूम की मांग भी बढ़ रही है। इसे किसान अपने घर में भी उगा सकते हैं। उन्होंने अन्य किसानों से भी पारंपरिक खेती के साथ मशरूम उत्पादन को अपनाने का आह्वान किया।
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कई पुरस्कारों से हो चुके हैं सम्मानित
मशरूम उत्पादन में बेहतर कार्य और नवाचार के लिए जगदीश वर्मा को जिला स्तरीय उत्कृष्ट किसान सम्मान, प्रगतिशील मशरूम उत्पादक पुरस्कार और कृषि अन्वेषक एवं किसान गोष्ठी पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है।

जगदीश वर्मा ने उगाई मशरूम। संवाद

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