फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Bilaspur News: योजना को स्तरोन्नत करने के नाम पर उजड़ी खेती, कूहल तोड़ी तो सूख गए खेत

विज्ञापन
विज्ञापन
73 लाख खर्च किए, फिर भी 42 हेक्टेयर भूमि सिंचाई से वंचित
विज्ञापन

15 दिन में समाधान नहीं हुआ तो जल शक्ति विभाग का घेराव करेंगे किसान

संवाद न्यूज एजेंसी
भगेड़ (बिलासपुर)। जिस सिंचाई व्यवस्था ने दशकों तक क्षेत्र के किसानों के खेतों को पानी देकर फसलों को संजीवनी दी, वही व्यवस्था अब स्तरोन्नत के नाम पर किसानों के लिए अभिशाप बन गई है। भगेड़ क्षेत्र के हीरापुर, बड़ोआ और भजवाणी गांवों में पारंपरिक कूहल को तोड़कर बिछाई गई पाइपलाइन से खेतों तक पानी पहुंचना पूरी तरह बंद हो गया है। इससे नाराज किसानों ने जल शक्ति विभाग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
विज्ञापन

समस्या को लेकर भाजपा किसान मोर्चा घुमारवीं के पूर्व अध्यक्ष एवं औहर पंचायत के पूर्व प्रधान देशराज शर्मा की अगुवाई में किसानों ने जल शक्ति विभाग झंडूता के अधिशासी अभियंता को ज्ञापन सौंपा। किसानों ने मांग की कि सिंचाई व्यवस्था को तत्काल बहाल किया जाए, अन्यथा 15 दिनों के भीतर विभाग का घेराव किया जाएगा। देशराज शर्मा ने बताया कि रुक्मणी कुंड से हीरापुर, बड़ोआ और भजवाणी गांवों के लिए साल 1960 में सिंचाई योजना तैयार की गई थी। कूहल के माध्यम से वर्षों तक खेतों तक नियमित रूप से पानी पहुंचता रहा। इस व्यवस्था के चलते क्षेत्र के किसान धान, गेहूं, सब्जियों सहित अन्य नकदी फसलों की खेती करते थे। उन्होंने कहा कि वर्ष 2020 में जल शक्ति विभाग ने इस योजना को स्तरोन्नत करने का निर्णय लिया और नाबार्ड से इसके लिए 73 लाख रुपये की राशि स्वीकृत करवाई गई। इसके बाद विभाग ने जल्दबाजी में टेंडर प्रक्रिया पूरी कर पारंपरिक कूहलें पूरी तरह तोड़ दीं और उनकी जगह पाइपलाइन बिछा दी। किसानों का आरोप है कि पाइपलाइन बिछाने के बाद खेतों तक पानी की आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई। न तो पर्याप्त प्रेशर से पानी पहुंच रहा है और न ही पाइपलाइन की तकनीकी व्यवस्था सही तरीके से काम कर रही है। नतीजतन लगभग 42 हेक्टेयर कृषि भूमि सिंचाई सुविधा से वंचित हो चुकी है। किसानों का कहना है कि पानी न मिलने से वे नकदी फसलें उगाने में असमर्थ हो गए हैं। कई किसानों को खेती छोड़ने या फिर बारिश पर निर्भर रहने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। इससे न केवल उनकी आर्थिक स्थिति बिगड़ रही है, बल्कि क्षेत्र की कृषि व्यवस्था भी संकट में आ गई है। लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद योजना का जमीनी स्तर पर कोई लाभ नहीं मिला, जो गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने पूरे मामले में भारी गड़बड़झाले की आशंका जताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है, ताकि यह पता चल सके कि योजना कहां और कैसे विफल हुई। किसानों ने चेतावनी दी कि यदि 15 दिन के भीतर सिंचाई व्यवस्था बहाल नहीं की गई और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई, तो वे जल शक्ति विभाग झंडूता के कार्यालय का घेराव करेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी विभाग की होगी।
विज्ञापन

इस अवसर पर बलवीर सिंह, सुनील दत्त, राजीव शर्मा, लक्ष्मण दास, विपिन शर्मा, विमल शर्मा, राम प्रकाश शर्मा सहित बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें