कोल बांध परियोजना की लापरवाही से 85 लाख की लागत से बांध में डाला गया मछली का बीज नष्ट हो रहा है। बांध में चैंबर पर जाली न लगाने के कारण टनों के हिसाब से मछलियां टरबाइन में पिस रही हैं।
मगर इसके बारे में प्रबंधन कोई उचित कदम उठाने को तैयार नहीं है। कोल बांध प्रबंधन की इस लापरवाही के कारण मत्स्य कमेटियों पर आने वाले दिनों में आर्थिक संकट खड़ा होने का खतरा मंडरा रहा है।
कोल बांध में 13 फरवरी 2016 में करीब 85 लाख की राशि का मछली का बीज डाला था। इससे यहां की मत्स्य कमेटियां मछली का कारोबार कर अपने परिवार का पालन कर सके। मगर कोल बांध परियोजना की लापरवाही से हर रोज लाखों की मछलियां मर रही है।
मगर प्रबंधन है कि इतना कुछ होने के बाद भी चैंबर पर जाली लगाने को तैयार नहीं है। अगर समय रहते चैंबर में जाली नहीं लगाई गई तो लाखों की लागत से खरीदे गए बीज की तो बर्बादी होगी ही साथ ही मछली पालन करके परिवार का पालन पोषण करने वाले मछुवारों पर भी संकट खड़ा हो जाएगा।
एनटीपीसी प्रबंधन को जाली लगाने को कहेंगे
मत्स्य विभाग के एडीएफ राजन सूद से बात की गई तो उन्होंने कहा कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि जल्द ही वो मत्स्य पालन विभाग के अधिकारी को मौके पर भेजकर इसकी जांच करेंगे और एनटीपीसी प्रबंधन से भी चैंबर में जाला लगवाने की बात करेंगे।
एनटीपीसी की लापरवाही से हो रहा नुकसान
द कसोल चमयोंण विस्थापित सहकारी सभा के प्रधान जगदीश ठाकुर ने कहा कि एनटीपीसी की लापरवाही से मत्स्य कमेटियों का लाखों का नुकसान हो रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि एनटीपीसी इसकी जिम्मेदारी लेते हुए सहकारी सभा के नुकसान की भरपाई करेगी और मछलियों को हर रोज इस तरह के नुकसान को बचाने के लिए जल्द से जल्द चैंबर के चारों ओर जाला लगवाएं।
ऐसे मर रही है मछलियां
कोल बांध परियोजना में चैंबर के माध्यम से पेन स्टॉक में बांध का पानी जाता है और पेन स्टॉक से टरबाइन चलाई जाती है। लेकिन चैंबर में जाली न होने के कारण हर रोज टरबाइन में टनों के हिसाब से मछलियां जाकर मर जाती हैं।