- प्रशासन ने व्यक्ति को जारी किया नोटिस, जवाब दायर के दिए निर्देश
- धर्मशाला-शिमला हाईवे पर दिनभर एक लेन पर यातायात रहा बाधित
- राजनकांत का दावा, प्रशासन ने पहले शहर में खोखा लगाने की दी थी अनुमति
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। शिमला-धर्मशाला हाईवे पर मंगरोट में चल रहा भूमि विवाद नहीं सुलझ पाया है। हाईवे की आठ बिस्वा भूमि पर दावा करने वाले व्यक्ति ने वीरवार को फिर से वहां पत्थर, रेहड़ी और चूल्हा लगा दिया। हाईवे के उस हिस्से पर दिनभर एक लेन पर यातायात बाधित रहा।
भूमि को अपना बताने वाले राजनकांत ने दावा किया है कि प्रशासन ने उसे पहले शहर में किसान भवन के पास खोखा लगाने की अनुमति थी, लेकिन अब उसे हटाने को कहा। इस कारण उसे मंगरोट में अपनी भूमि पर कब्जा करना पड़ा है। वहीं, एसडीएम सदर अभिषेक कुमार गर्ग ने राजनकांत शर्मा को हाईवे को अवरुद्ध करने के लिए धारा 133 के तहत नोटिस जारी किया है। नोटिस में निर्देश दिए है कि इस मामले का निपटारा न्यायालय की ओर से किया जा सकता है। जब तक मामले का निपटारा नहीं हो जाता तब तक हाईवे को अवरुद्ध न किया जाए। मार्ग अवरुद्ध करने से जहां यातायात में बाधा पड़ेगी, वहीं आमजन को भी आवागमन में असुविधा होगी। मार्ग अवरुद्ध होने से जानमाल की भी हानि हो सकती है। इसलिए राजनकांत और उनकी मां सीता देवी तुरंत को मार्ग बहाल करें। साथ ही अपना जवाब उपमंडल दंडाधिकारी के न्यायालय में दायर करें। बता दें कि दिसंबर 2022 में उच्च न्यायालय के आदेश पर मंगरोट में हाईवे के किनारे से राजन कांत शर्मा का खोखा को हटाया गया था। इसके बाद से भूमि विवाद शुरू हो गया। राजनकांत शर्मा ने तब राजमार्ग उसकी भूमि से होकर गुजरने का दावा कर उस पर खोखा लगा दिया, जिसे हटाने में प्रशासन को काफी मशक्कत करनी पड़ी थी। मामले में कोई परिणाम नहीं निकले पर राजनकांत ने मार्च फिर से खोखा लगा दिया था। तब प्रशासनिक अधिकारियों के निशानदेही करने के आश्वासन पर राजनकांत ने खोखा हटाया था। इसके बाद निशानदेही की गई, जिसमें राजमार्ग की आठ बिस्वा भूमि निजी पाई गई, लेकिन यह भूमि राजनकांत को नहीं मिली। लोक निर्माण विभाग फिर से निशानदेही कराने की बात कर रहा है, जबकि राजनकांत भूमि वापस करने या रोजगार के लिए किसी और जगह भूमि देने की मांग कर रहा है।