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कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन : इंतकाल और नक्शों में भारी गड़बड़ी

Fri, 27 Feb 2026 10:23 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
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क्षेत्रीय अभिकरण की जांच रिपोर्ट में पाई गई कई खामियां
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कई मौजों के खसरा नंबरों में गलत करम, अधूरा सीमांकन
फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति ने पीएमओ से की थी शिकायत
निर्देशों के बाद शुरू हुई थी राजस्व विभाग में अनियमितताओं की जांच

संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन परियोजना को लेकर राजस्व रिकॉर्ड में गंभीर अनियमितताएं उजागर हुई हैं। तहसीलदार झंडूता के आदेश की अनुपालना में की गई विस्तृत जांच में कई मौजों के खसरा नंबरों, करूकान और इंतकाल के नक्शों में व्यापक त्रुटियां सामने आई हैं। रिपोर्ट को आगामी प्रशासनिक व कानूनी कार्रवाई के लिए उच्चाधिकारियों को भेजा जाएगा।
जानकारी के अनुसार वर्ष 2025 में फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति ने प्रधानमंत्री कार्यालय को शिकायत भेजकर बताया था कि फोरलेन भूमि अधिग्रहण के दौरान भूमि सीमांकन और इंतकाल प्रक्रिया में गंभीर गड़बड़ियां की गई हैं। पीएमओ से निर्देश मिलने के बाद राजस्व विभाग ने मामले की जांच शुरू की, जिसकी अब लिखित रिपोर्ट तैयार हो चुकी है। इस रिपोर्ट में पाया गया है कि मौजा धराडसानी में एक खसरा नंबर की एक भुजा राजस्व रिकॉर्ड में 44 करम दर्ज है, जबकि फोरलेन इंतकाल नक्शे में इसे 54 करम दर्ज कर 18+36 में विभाजित किया गया। इसके अलावा एक और खसरा नंबर की एक लाइन को विभाजित कर दर्ज नहीं किया गया। रिपोर्ट में बताया कि मौजा भटेड़ में दो खसरा नंबर की मध्य भुजा का विभाजन स्पष्ट नहीं है। उल्लेख है कि नक्शा स्कैन होने और स्याही फैलाव अधिक होने के कारण कई खसरा नंबरों के करूकान पढ़ने योग्य नहीं पाए गए। मौजा मरहोईयां में दो खसरा नंबरों की मध्य रेखा राजस्व रिकॉर्ड में 56 करम दर्ज है, लेकिन फोरलेन नक्शे में 53 करम लिखकर (10+34+9) में विभाजित किया गया। खसरा नंबर 78/1 में 58 करम दर्ज हैं, जबकि मौके पर माप में यह 75 करम से अधिक पाए गए। इसी नंबर की सीमा रेखा 169 करम दर्ज है, मगर विभाजन के बाद कुल करम 169 नहीं बनते हैं। मौजा कोठी के खसरा नंबर 103 और मौजा लधेडा के खसरा नंबर 110 की कॉमन भुजा 74 करम दर्ज है। जांच में पाया गया कि कोठी में 74 करम के बाद 13 करम पर विभाजन किया गया, जबकि लधेडा में 10 करम पर। इससे दोनों मौजों में फोरलेन सड़क की सीमा में तीन करम का अंतर सामने आया है। मौजा कलर में खसरा नंबर की लाइन को विभाजित कर एक साइड दर्ज ही नहीं की गई। एक खसरा नंबर की 40 करम की भुजा को भी विभाजित कर अंकित नहीं किया गया। कुछ स्थानों पर 10 करम की भुजा को गलत लिखकर (8+7+2) में विभाजित किया गया।
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मौजा भंजवाणी की सीमा पर नक्शा स्पष्ट नहीं है और पढ़ने योग्य भी नहीं पाया गया। मौजा छत में खसरा नंबर की 52 करम की भुजा को विभाजित कर दर्ज नहीं किया गया। बैहना जट्टां में दो खसरा नंबर की मध्य रेखा 20 करम दर्ज है, लेकिन फोरलेन नक्शे में इसे गलत तरीके से 16+12 में विभाजित किया गया। मौजा कोठी, लधेडा, बैहलग सहित कई मौजों में खसरा नंबर के फोरलेन फ्रंट के करूकान दर्ज नहीं पाए गए। कुछ स्थानों पर लाल स्याही से फोरलेन फ्रंट अंकित है, लेकिन संबंधित करूकान स्पष्ट दर्ज नहीं हैं। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि राष्ट्रीय राजमार्ग मुख्यालय बिलासपुर के पत्रों के अनुसार मौजा कलर, छत, धराडसानी, बैहना में करूकान दुरुस्ती पहले भी की जा चुकी है। इसके बावजूद दोबारा गड़बड़ियां सामने आना सवाल खड़े कर रहा है। तहसीलदार ने पूरी रिपोर्ट आगामी कार्रवाई के लिए उच्च अधिकारियों को भेजी जा रही है। फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति ने मांग की है कि राजस्व रिकॉर्ड की सभी त्रुटियों को तुरंत दुरुस्त कर जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
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