ग्राम पंचायत की गलती से बढ़ी आम नागरिक की परेशानी
जन्मतिथि सही कराने के लिए महीनों से काट रहे सरकारी कार्यालयों के चक्कर
संवाद न्यूज एजेंसी
घुमारवीं(बिलासपुर)। आजादी के इतने वर्ष बाद भी अगर एक आम नागरिक को अपने हक के लिए टॉर्च लेकर सड़कों पर उतरना पड़े, तो यह न सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है बल्कि लोकतंत्र की जड़ों को भी हिला देता है। ऐसा ही एक मामला घुमारवीं उपमंडल की भराड़ी उप तहसील के अंतर्गत ग्राम पंचायत गाहर के गांव मुहाना से सामने आया है, जहां निवासी रणजीत सिंह अपनी सही जन्मतिथि के प्रमाण के लिए महीनों से पंचायत कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं।
रणजीत सिंह के पिता भारतीय सेना में सेवामुक्त थे। रणजीत ने कहा कि उन्हें अपने पिता की पेंशन से संबंधित कुछ बकाया राशि प्राप्त करनी है, जिसके लिए जरूरी दस्तावेजों के साथ जन्मतिथि प्रमाण पत्र की भी आवश्यकता पड़ी। जब उन्होंने यह प्रमाण पत्र ग्राम पंचायत गाहर से प्राप्त किया, तो उसमें उनकी जन्मतिथि 11 नवंबर 1967 की बजाय 11 दिसंबर 1967 दर्ज पाई गई। कहा कि उनकी सही जन्मतिथि 11 नवंबर 1967 है, जो कि उनके आधार कार्ड, पैन कार्ड, स्कूल प्रमाण पत्र और 1974 से लेकर 2023 तक पंचायत द्वारा जारी की गई परिवार नकलों में स्पष्ट रूप से दर्ज है। बावजूद इसके, 2025 में पंचायत द्वारा जारी परिवार नकल में अचानक से उनकी जन्मतिथि 11 दिसंबर 1967 कर दी गई। जब उन्होंने इस त्रुटि पर आपत्ति जताई और पंचायत सचिव से जवाब मांगा, तो उन्हें कोई संतोषजनक उत्तर नहीं मिला। कहा कि वह जानबूझकर उनकी बात को नजरअंदाज कर रहे हैं और दस्तावेजों को सही करने में टालमटोल कर रहे हैं। लगातार हो रही इस अनदेखी और मानसिक प्रताड़ना से परेशान होकर रणजीत सिंह ने घुमारवीं शहर में टॉर्च लेकर प्रदर्शन किया और तख्ती के माध्यम से अपनी पीड़ा को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया। उनका कहना है कि जब सरकार की ही गलती के कारण एक आम आदमी को संघर्ष करना पड़े, तो यह व्यवस्था की विफलता का प्रमाण है। अब उपमंडल अधिकारी घुमारवीं को भी आवेदन सौंपकर न्याय की गुहार लगाई है। उन्होंने प्रशासन से अपील की है कि उन्हें उनकी सही जन्मतिथि के अनुसार संशोधित प्रमाण पत्र प्रदान किया जाए ताकि वह अपने पिता की बकाया राशि प्राप्त करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ा सकें।
कोट
ग्राम पंचायत गाहर के सचिव रमेश कुमार ने बताया कि जब रणजीत सिंह द्वारा जन्म प्रमाण पत्र मांगा गया तो पंचायत रिकॉर्ड में वर्ष 1967 की प्रविष्टियों की जांच की गई। रिकॉर्ड में दर्ज जन्म प्रमाण पत्र के अनुसार रणजीत सिंह की जन्मतिथि 11 दिसंबर 1967 ही पाई गई, जिसके आधार पर परिवार नकल में भी वही तिथि अंकित करनी पड़ी। बताया कि यह मामला खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) के पास भी भेजा गया था। चूंकि जन्म प्रमाण पत्र एक मूल दस्तावेज होता है, उसमें बदलाव नहीं किया जा सकता, इसलिए खंड विकास अधिकारी द्वारा भी पत्र के माध्यम से रणजीत सिंह को सलाह दी गई है कि वह अन्य सभी दस्तावेजों में जन्मतिथि को जन्म प्रमाण पत्र के अनुसार बदलवाएं।