बिलासपुर। कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन निर्माण के लिए वन भूमि में हुई अवैध मक डंपिंग पर वन विभाग ने निर्माण कार्य कर रही कंपनी को 1 लाख 97 हजार 691 रुपये का जुर्माना लगाया है। इस राशि को कंपनी ने भर दिया है। इसकी पुष्टि डीएफओ बिलासपुर अवनि भूषण राय ने अपने कार्यालय के पत्र संख्या 8726 में की है।
फोरलेन का निर्माण कार्य कर रही कंपनी वन भूमि के यूटीएफ क्षेत्र जब्बल और सुन्नण में अवैध डंपिंग का कार्य कर रही थी। इसे लेकर फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति ने वन विभाग को शिकायत दी थी। वहीं अब अवैध डंपिग करने पर वन विभाग ने कंपनी से यह जुर्माना वसूला है। फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति के महासचिव मदनलाल शर्मा ने कहा कि इतने बड़े स्तर पर हुई अवैध मक डंपिंग पर वन विभाग सोया रहा और निजी कंपनी दिन-रात अपने अवैध काम को अंजाम देती रही।
समिति ने कहा कि अवैध मक डंपिंग पर विभाग द्वारा दी गई रिपोर्ट में बताया गया है कि इस भूमि पर कोई पेड़ नहीं थे। कहा कि पुराने रिकॉर्ड को खंगालकर पता लग जाएगा कि इस भूमि पर पेड़ थे या नहीं। वहीं अवैध डंपिंग में कितने पेड़ क्षतिग्रस्त हुए हैं और वन विभाग क्या रिकॉर्ड छुपा रहा है उससे पुष्टि हो जाएगी।
बताते चलें कि उपरोक्त परियोजना में पर्यावरण मंत्रालय ने सैद्धांतिक मंजूरी देते हुए काम शुरू करने से पहले राज्य सरकार को 5 अतिरिक्त शर्तों की अनुपालना करने के आदेश दिए थे। इसमें राज्य सरकार छह महीने में अभी तक केवल एक शर्त की ही अनुपालना कर पाई है। जबकि 4 अन्य शर्तों की अनुपालना करना शेष है। इसकी नियमानुसार जांच के लिए मुख्य अरण्यपाल सर्कल बिलासपुर नियुक्त किए गए हैं। जब तक सभी शर्तों की नियमानुसार अनुपालना नहीं हो जाती, तब तक वन भूमि के सड़क निर्माण कार्य पर रोक लगी रहेगी।