एक लाख जुर्माने के बाद विभागीय कार्रवाई पर शिकायतकर्ता ने उठाया सवाल
शिकायत कर पूछा कि बाकी जिम्मेदारों पर क्यों नहीं हुई कार्रवाई
बोर्ड मुख्यालय ने दोबारा मांगी इस प्रकरण की पूरी रिपोर्ट
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। भगेड़ फ्लाईओवर के पास नाले और सरकारी भूमि में अवैध मलबा फेंकने के मामले में अब जांच का दायरा और बढ़ सकता है। प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा निर्माणाधीन पेट्रोल पंप प्रोपाइटर पर एक लाख रुपये का पर्यावरण मुआवजा ठोकने के बाद शिकायतकर्ता ने सवाल उठाया है कि कार्रवाई केवल एक व्यक्ति तक ही क्यों सीमित रखी गई।
शिकायतकर्ता ने शिकायत कर बोर्ड से मांग की है कि इस अवैध डंपिंग में जिन अन्य लोगों की जिम्मेदारी बनती है, उन पर भी कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि फ्लाईओवर के समीप नाले और सरकारी भूमि में जो मलबा डाला गया, वह कई स्तरों की लापरवाही का परिणाम है। ग्राम पंचायत सचिव की रिपोर्ट और क्षेत्रीय निरीक्षण में यह साफ साबित हो चुका है कि निर्माणाधीन पेट्रोल पंप का मलबा बिना अनुमति डंप किया गया, जिससे जल स्रोतों को खतरा पैदा हुआ है। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने पहले ही 1 अगस्त 2025 को प्रोपाइटर को नोटिस जारी कर मलबा हटाने के निर्देश दिए थे, लेकिन उन्होंने न तो मलबा हटाया और न ही कोई जवाब प्रस्तुत किया। इसके बाद बोर्ड ने एक लाख रुपये का पर्यावरण मुआवजा लगाया था। जानकारी के अनुसार, अब बोर्ड मुख्यालय ने इस प्रकरण की पूरी रिपोर्ट दोबारा मांगी है ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि अन्य संबंधित जिम्मेदारों जैसे निर्माण कार्य से जुड़े ठेकेदार या पर्यवेक्षण करने वाले अधिकारी की भूमिका क्या रही। यह कदम शिकायतकर्ता की आपत्ति के बाद उठाया गया है। बताया जा रहा है कि यदि जांच में अन्य व्यक्तियों की संलिप्तता साबित होती है तो उनके विरुद्ध भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। बोर्ड ने यह भी चेताया है कि एनजीटी के 29 जुलाई 2013 के आदेश के अनुसार अवैध मलबा डंपिंग गंभीर अपराध की श्रेणी में आती है और इसमें न्यूनतम एक लाख रुपये मुआवजे का प्रावधान है।