संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रवीण कुमार ने बताया कि एनीमिया एक रोग है। भोजन में पौष्टिक तत्वों, आयरन, विटामिन लवणों, प्रोटीन की कमी, पेट के कीड़े, मलेरिया, क्षय रोग आदि से शरीर में खून का कम बनना, महिलाओं में अधिक माहवारी आना, दुर्घटना आदि में चोट लगने पर खून बहने के कारण व्यक्ति एनीमिक हो जाता है।
डॉ. प्रवीण ने बताया कि इस रोग से सबसे अधिक 4 माह से 6 साल के बच्चे, 11 साल से 18 साल की किशोरियां, गर्भवती और दूध पिलाने वाली माताएं अधिक प्रभावित होती हैं। जिन महिलाओं में खून की कमी रहती है, उन्हें गर्भावस्था में पल रहे बच्चे में खून की कमी होने पर मानसिक और शारीरिक रूप से दुर्बल पैदा होने की संभावना ज्यादा रहती है। बच्चों में खून की कमी होने पर वजन और लंबाई नहीं बढ़ती। उन्होंने बताया कि त्वचा का सफेद दिखना, जीभ, नाखूनों और पलकों के अंदर सफेदी, कमजोरी और बहुत अधिक थकावट, चक्कर आना, बेहोश होना, सांस फूलना, हृदय गति का तेज होना, चेहरे और पैरों पर सूजन दिखाई देना इस रोग के लक्षण हैं। एनीमिया को खत्म करने के लिए स्कूलों में बिप्स कार्यक्रम आरंभ किया गया है, जिसमें 6 वर्ष से 10 वर्ष तक के बच्चों के लिए गुलाबी रंग की गोली, 11 वर्ष से 19 वर्ष के बच्चों के लिए नीली गोली सप्ताह में एक बार दी जाती है। गर्भवती और दूध पिलाने वाली महिलाओं के लिए लाल रंग की गोली दी जाती है जो हीमोग्लोबिन यानी खून बढ़ाने का काम करती है। उन्होंने बताया कि सभी सरकारी अस्पतालों में खून की मुफ्त में जांच की जाती है।