मामले को लेकर वन विभाग से सात दिन में मांगी रिपोर्ट
कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन वन भूमि पर लगे पिलरों के सत्यापन का है मामला
विशेष सचिव वन ने प्रधान मुख्य अरण्यपाल को जारी किए निर्देश, मामला मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंचा
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन के निर्माण के लिए डायवर्ट की गई वन भूमि पर लगे राइट ऑफ वे आरसीसी पिलरों के सत्यापन को लेकर प्रदेश सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। बार-बार पत्राचार के बावजूद इस मामले में कार्रवाई न होने पर वन विभाग के विशेष सचिव ने प्रधान मुख्य अरण्यपाल से कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है। विभाग को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि इस मामले की तथ्यात्मक रिपोर्ट सात दिनों के भीतर सरकार को भेजी जाए।
यह मामला फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति के माध्यम से मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंचा था। समिति ने 16 मार्च 2026 को एक प्रतिनिधित्व पत्र सौंपकर पिलरों के सत्यापन में हो रही देरी और अनियमितताओं की शिकायत की थी। मुख्यमंत्री कार्यालय ने इस पर संज्ञान लेते हुए वन विभाग को तत्काल जांच के आदेश दिए थे। सरकारी पत्र के अनुसार, वन विभाग ने इससे पहले 10 फरवरी 2026 को भी इस संबंध में निर्देश जारी किए थे, लेकिन निचले स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। विशेष सचिव की ओर से जारी ताजा आदेशों में इस कार्य को शीर्ष प्राथमिकता पर रखने को कहा गया है। बता दें कि फोरलेन के लिए अधिग्रहित वन भूमि की सीमाओं को चिह्नित करने के लिए लगाए गए आरसीसी पिलरों के स्थान को लेकर प्रभावितों ने सवाल उठाए हैं। विभाग द्वारा अभी तक एक्शन टेकन रिपोर्ट दाखिल नहीं की गई है, जिससे विस्थापितों का मामला लटका हुआ है। प्रभावित समिति का कहना है कि पिलरों का सही सत्यापन न होने से उनकी निजी भूमि और डाइवर्ट की गई वन भूमि के बीच भ्रम की स्थिति बनी हुई है। इसी शिकायत के बाद कार्रवाई करते हुए अब विभाग को इस मामले में सात दिन के भीतर तथ्यात्मक स्थिति स्पष्ट करने के आदेश दिए गए हैं। लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।