-अभिभावक बोले, सरकार के निर्णय से बढ़ रहा मानसिक तनाव
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। शैक्षणिक सत्र 2024-25 में पहली कक्षा 6 साल पूरे होने पर ही दाखिले की शर्त पर अभिभावकों ने सरकार से विचार करने और इसमें दो साल की राहत देने की मांग की है। अभिभावकों का कहना है कि इस निर्णय से वह मानसिक रूप से भी परेशान हैं।
बिलासपुर में आयोजित पत्रकार वार्ता में अधिवक्ता सुमन ठाकुर और अभिभावकों ने बताया कि इस निर्णय में बदलाव के लिए उन्होंने अधिकारियों और नेताओं को भी ज्ञापन सौंपे हैं, लेकिन उनकी इस मांग पर कोई सुनवाई नहीं हो रही है। उन्होंने बताया कि जिन बच्चों की आयु मार्च 2024 में साढ़े पांच साल या 30 सितंबर 2024 को छह साल पूरी होगी उसे ही पहली कक्षा में दाखिला मिलेगा। जो बच्चे पहले से ही पढ़ रहे हैं और छह साल की आयु पूर्ण करने वाली शर्त को पूरा नहीं कर पा रहे हैं, उनके साथ तो सरकार अन्याय कर रही है। क्योंकि जो बच्चा अभी यूकेजी में पढ़ रहा है और मार्च में साढ़े पांच साल का नहीं होता है तो उसे फिर से यूकेजी में दाखिला लेना पड़ेगा। अभिभावकों ने कहा कि इससे बच्चे की पढ़ाई पर असर पड़ेगा। बच्चे पर मानसिक तनाव बढ़ेगा। इससे अभिभावकों पर भी आर्थिक बोझ बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि कर्नाटक, केरल और गोवा में भी सरकार ने इसमें दो साल की राहत प्रदान की है। उन्होंने कहा कि वह निर्णय का विरोध नहीं कर रहे हैं। केवल इस निर्णय में दो साल की राहत प्रदान की जाए, ताकि जो बच्चे नियमित स्कूल जा रहे हैं उनकी पढ़ाई पर असर न पड़े। उन्होंने कहा कि इसको लेकर वह कल सीएम से भी मिलेंगे। इस मौके पर अधिवक्ता परवेश चंदेल भी मौजूद रहे।