भाजपा-कांग्रेस दोनों साध रहे हैं कब्जा करने के लिए सियासी समीकरण
बहुमत के बावजूद भाजपा ने नहीं खोले पत्ते, कोरम न बनने से टला चुनाव
मंगलवार को होगा शक्ति परीक्षण, 6-3 के आंकड़ों के बीच भितरघात की आशंका
संजीव शामा
घुमारवीं(बिलासपुर)। नगर परिषद घुमारवीं में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव शनिवार को टल गया। पार्षदों की सामूहिक गैरहाजिरी के कारण यह स्थिति बनी। राजनीतिक जानकार इसे भाजपा और कांग्रेस दोनों की रणनीति का हिस्सा मान रहे हैं।
नगर परिषद में कुल नौ पार्षद हैं, जिनमें भाजपा के पास छह और कांग्रेस के पास तीन पार्षद हैं। संख्या बल में मजबूत होने के बावजूद भाजपा ने अभी तक अध्यक्ष पद के लिए पत्ते नहीं खोले हैं। सूत्रों के अनुसार, भाजपा के दो पार्षद अध्यक्ष पद के लिए मजबूत दावेदारी जता रहे हैं। इससे पार्टी नेतृत्व सभी पार्षदों को एकजुट रखने की चुनौती का सामना कर रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि एक दावेदार के पक्ष में फैसला होने पर भीतरघात हो सकता है। कांग्रेस, संख्या बल में कमजोर होने के बावजूद घटनाक्रम पर नजर रख रही है। पहली बैठक में कोरम पूरा न होने देने की रणनीति पहले से तैयार थी। चुनाव के लिए सात पार्षदों की उपस्थिति आवश्यक थी।
भाजपा की चुनौती
भाजपा नेतृत्व अध्यक्ष पद को लेकर सहमति बनाने में देरी कर रहा है। पार्टी के भीतर दो दावेदारों के बीच खींचतान चल रही है। किसी एक को चुनने पर दूसरे खेमे की नाराजगी का डर है। भाजपा सार्वजनिक तौर पर मतभेद से इन्कार कर रही है। पार्टी सभी छह पार्षदों के एकजुट होने का दावा करती है।
कांग्रेस की रणनीति और आगामी चुनाव
कांग्रेस ने भी समय का उपयोग अपनी रणनीति के लिए किया। भाजपा के छह पार्षद आने पर भी कांग्रेस के तीन पार्षदों की अनुपस्थिति से चुनाव नहीं हो सकता था। सियासी हलकों में रीता सहगल को कांग्रेस का संभावित उम्मीदवार बताया जा रहा है। नगर परिषद को डेढ़ माह बाद भी स्थायी नेतृत्व नहीं मिल पाया है। इससे विकास कार्यों की गति पर असर पड़ने की आशंका है। मंगलवार को होने वाला चुनाव अब दोनों दलों की रणनीति की परीक्षा होगा।