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Bilaspur News: कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन परियोजना में भूमि अधिग्रहण पर विरोधाभासी निर्देश

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प्रशासन और एनएचएआई से की स्पष्ट और एक समान निर्देश जारी करने की मांग
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भूमि मालिकों के हितों पर हो रहा प्रतिकूल असर
संवाद न्यूज
बिलासपुर। कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन परियोजना में अधिग्रहित भूमि के संचालन और दुरुस्ती को लेकर उपमंडल प्रशासन और एनएचएआई की विशेष इकाई के बीच लगातार विरोधाभासी निर्देश जारी होने से जनता में भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है। इस विवाद ने स्थानीय राजस्व कार्य प्रणाली पर भी संदेह पैदा कर दिया है।
उपमंडलाधिकारी झंडूता ने तहसीलदार झंडूता को निर्देश दिए थे कि उपरोक्त परियोजना में अधिग्रहण की गई भूमि में पाई गई त्रुटियों की सूचियों को एनएचएआई की विशेष इकाई के तहसीलदार को भेजें और इस मामले में सक्षम न्यायालय से आदेश प्राप्त करें। इसके बाद न्यायालय से प्राप्त आदेशों के अनुसार ही कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है। हालांकि, मामला दिन-ब-दिन उलझता जा रहा है। कभी एनएचएआई की इकाई के तहसीलदार अतिरिक्त दुरुस्तियां बिना अनुमति कर देते हैं, तो कभी वे नियमों के अनुसार कार्रवाई की पुष्टि करते हैं। इसके अलावा कभी तहसीलदार झंडूता को दुरुस्ती करवाने का आग्रह करना पड़ता है, तो कभी साधारण पत्र के माध्यम से अनुमति मांगी जाती है। इस तरह लगातार विरोधाभासी कार्रवाई से प्रशासनिक प्रक्रिया में असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो रही है।
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फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति ने इस स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि विरोधाभासी निर्देशों के कारण परियोजना प्रभावित भूमि मालिकों के अधिकारों और हितों पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। समिति ने मांग की है कि प्रशासन और एनएचएआई की विशेष इकाई स्पष्ट और एक समान निर्देश जारी करे, ताकि भूमि मालिकों को भ्रम और असमंजस से बचाया जा सके। समिति ने यह भी कहा कि प्रभावित लोगों को न्यायालयीन आदेशों और प्रशासनिक प्रक्रिया की पूरी जानकारी समय पर दी जाए, जिससे उनकी सुरक्षा और हित सुनिश्चित हो सके।
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स्थानीय सूत्रों के अनुसार इस विरोधाभासी दिशा-निर्देशों के कारण आम जनता और प्रभावित भूमि मालिकों में भ्रांतियां फैल रही हैं। लोग यह समझ नहीं पा रहे हैं कि भूमि दुरुस्ती कब और किसके निर्देशानुसार होगी। इससे परियोजना के संचालन और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पर भी सवाल उठ रहे हैं।
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