क्षेत्र में स्ट्रीट वेंडर के नाम पर स्थापित किए गए हैं रेहड़ी-फड़ी वाले प्रवासी
नगर परिषद 50 रुपये प्रतिदिन वसूलकर जगह करता है प्रदान
संवाद न्यूज एजेंसी
घुमारवीं (बिलासपुर)। नगर परिषद घुमारवीं क्षेत्र के तहत स्ट्रीट वेंडर के नाम पर स्थापित किए गए रेहड़ी-फड़ी वाले प्रवासी बिना फूड सेफ्टी लाइसेंस और शॉप एंड एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के तहत खाद्य पदार्थ बेच रहे हैं। यह लोग न केवल सरकारी जमीनों पर अवैध रूप से कब्जा करके बैठे हैं, बल्कि लोगों की सेहत से भी खिलवाड़ कर रहे हैं।
शिमला-धर्मशाला राष्ट्रीय राजमार्ग-103 के दोनों ओर घुमारवीं शहर के अंदर व बाहरी इलाकों में जहां भी इन्हें थोड़ी सी जगह खाली दिखाई देती है, वहीं पर यह लोग अस्थायी तौर पर अपना काम शुरू कर देते हैं। धीरे-धीरे यह अस्थायी ठिकाने स्थायी रूप में बदल जाते हैं और सरकारी भूमि पर अतिक्रमण का रूप ले लेते हैं। इनकी वजह से सड़क दुर्घटनाओं का भी अंदेशा बना रहता है। खास बात यह है कि इन प्रवासी विक्रेताओं के पास न तो खाद्य सुरक्षा विभाग से कोई लाइसेंस है और न ही दुकान पंजीकरण की अनुमति। ऐसे में इनके द्वारा बेचे जा रहे खाद्य पदार्थ न तो मानकों पर खरे उतरते हैं और न ही इनकी गुणवत्ता की कोई जांच होती है। इससे आम जनता की सेहत पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। नगर परिषद घुमारवीं की लापरवाही का आलम यह है कि वह मात्र 50 रुपये प्रतिदिन किराया वसूल कर इन लोगों को जगह प्रदान कर रही है, जबकि नगर परिषद के पास न तो स्ट्रीट वेंडरों के लिए कोई स्थाई नीति है और न ही उनके लिए निश्चित स्थान निर्धारित हैं। यही कारण है कि यह लोग जहां मन चाहे वहां कब्जा करके बैठ जाते हैं।
स्थानीय जनता ने कई बार इस बारे में प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया है, लेकिन अभी तक न तो कोई ठोस कार्रवाई हुई है। लोगों की मांग है कि प्रशासन और नगर परिषद को जल्द से जल्द ठोस कार्रवाई करते हुए अवैध वेंडरों के खिलाफ सख्त कदम उठाए ताकि सरकारी भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया जा सके ।
कोट
खाद्य पदार्थ बनाने तथा बेचने के लिए फूड सेफ्टी लाइसेंस जरूरी है। विभाग समय-समय पर इस बारे में लोगों को जागरूक भी करता है और जांच भी की जाती है। मामला ध्यान में आया है जल्द ही ऐसे सभी लोगों की जांच की जाएगी जो बिना फूड सेफ्टी लाइसेंस के खाद्य पदार्थ बना रहे हैं और बेच रहे हैं।
केएस ठाकुर, निरीक्षक, खाद्य सुरक्षा विभाग बिलासपुर