बिलासपुर। साल 2018 में श्री नयनादेवी जी रेंज में वन अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से न केवल खैर का अवैध कटान हुआ, बल्कि उस खैर को दिल्ली, पंजाब और हरियाणा की कत्था फैक्ट्रियों में भी पहुंचाया गया। इस मामले की विजिलेंस जांच साढ़े तीन साल बाद भी पूरी नहीं हो पाई है। अभी तक जांच एजेंसी को यह भी पता नहीं है कि और कितने लंबे समय तक इस मामले की जांच चलेगी और कब इसे पूरा किया जाना है।
श्री नयनादेवी जी रेंज में साल 2018 में अवैध खैर कटान का मामला सामने आया था। सलोआ, भाखड़ा, बड़ोह, कोट और बस्सी वन बीट में करीब 18 हजार खैर के पेड़ काटे गए थे। 25 फरवरी 2018 के अंक में अमर उजाला ने मामले का खुलासा किया था। इसके बाद विजिलेंस ने पहली एफआईआर दर्ज की थी। विजिलेंस ने कई चेक पोस्टों, वन कर्मचारियों के घरों के अलावा ठेकेदारों के यहां छापे मारकर इस अवैध खैर कटान के संदर्भ में साक्ष्य जुटाए थे। मामले में पीएमओ के हस्तक्षेप के बाद विजिलेंस जांच शुरू हुई थी। लेकिन अवैध खैर कटान वाला क्षेत्र बहुत लंबा होने के कारण इसकी निशानदेही में काफी समय लगा।
हैरत की बात है कि करीब 35 करोड़ के अवैध खैर कटान के कई साक्ष्य होने के बाद भी जांच एजेंसी तीन साल में भी इसकी जांच पूरी नहीं कर पाई है। मामले से जुड़ी करीब 50 फीसदी जांच ही अभी तक पूरी हो पाई है। इस वन बीट में 18 हजार खैर के पेड़ों का अवैध कटान हुआ था। एक बीट में 9 करोड़ का कटान हुआ है। वहीं कुल पांच बीट में करीब 35 करोड़ की वन संपदा का अवैध कटान किया गया है।
विजिलेंस के डीएसपी संजय ने बताया कि जांच एजेंसी बाहरी राज्यों की कत्था फैक्ट्रियों से सबूत जुटाने में लगी है। यह जांच कब पूरी होगी इसके बारे में अभी कुछ नहीं कहा जा सकता है। जांच पूरी होने के बाद विजिलेंस एफआईआर में जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों के नाम भी जोड़ेगी। अभी तक हुई एफआईआर में लिखा है कि अवैध कटान के लिए वन विभाग के अधिकारी, कर्मचारी और ठेकेदार शामिल हैं।