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Bilaspur News: सहारा पेंशन से बाहर किए दिव्यांग, बोले-रोजगार दें या पेंशन बहाल करें

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जिले में दिव्यांग संगठनों ने सरकार पर उपेक्षा का लगाया आरोप
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पेंशन बढ़ाने और रिक्त पद भरने की उठाई मांग

संवाद न्यूज एजेंसी

बिलासपुर। दिव्यांगजनों ने सहारा पेंशन योजना से बड़ी संख्या में लाभार्थियों को बाहर किए जाने पर सरकार के खिलाफ नाराजगी जताई है। बिलासपुर में आयोजित पत्रकार वार्ता में सामर्थ्य हमारी पहचान संस्था के अध्यक्ष एवं अधिवक्ता लग्नेश कुमार, दिव्यांग कल्याण संघ के जिलाध्यक्ष विनोद कुमार और सचिव रचना कुमारी ने कहा कि सरकार दिव्यांग कल्याण के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर दिव्यांगों को अपेक्षित सहायता नहीं मिल रही।
उन्होंने आरोप लगाया कि सहारा पेंशन बंद होने से हजारों दिव्यांग आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। लग्नेश कुमार ने कहा कि पिछली सरकार की ओर से शुरू की सहारा पेंशन का लाभ एक वर्ष से नहीं मिल रहा। अब अधिकांश दिव्यांगों को योजना से बाहर कर इसका दायरा केवल गंभीर बीमारियों से ग्रसित लोगों तक सीमित कर दिया गया है। इससे दवाइयों और रोजमर्रा के खर्च पूरे करना मुश्किल हो गया है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार रोजगार उपलब्ध नहीं करा सकती, तो कम से कम पहले की तरह सभी दिव्यांगों को सहारा पेंशन का लाभ दिया जाए।
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इस दौरान दिव्यांगों ने आर्थिक परेशानियां साझा कीं। उनका कहना था कि हर महीने दवाइयों पर हजारों रुपये खर्च हो जाते हैं, जबकि परिवार की आय बेहद सीमित है। सहारा पेंशन बंद होने से कई लोगों को इलाज बीच में छोड़ने की मजबूरी झेलनी पड़ रही है।
दिव्यांग संगठनों ने प्रदेश दिव्यांग कल्याण बोर्ड की बैठक शीघ्र बुलाने, विभागों में दिव्यांग कोटे के रिक्त पद बैकलॉग के आधार पर भरने तथा छह जुलाई 2022 की पदोन्नति संबंधी अधिसूचना को प्रभावी ढंग से लागू करने की मांग की।
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संगठनों ने सभी दिव्यांगों के लिए सामाजिक सुरक्षा पेंशन समान रूप से कम से कम तीन हजार रुपये प्रतिमाह करने की भी मांग उठाई। उनका कहना था कि वर्तमान में 70 से 100 प्रतिशत दिव्यांगता वाले लोगों को 1700 रुपये, जबकि अन्य दिव्यांगों को 1150 रुपये मासिक पेंशन मिल रही है। सरकार 100 प्रतिशत दिव्यांगता की शर्त समाप्त कर सभी दिव्यांगों को समान पेंशन और समान अधिकार सुनिश्चित करे। इससे पहले दिव्यांगजनों ने बैठक कर विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की।
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