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Bilaspur News: अधीक्षण अभियंता की समिति रिपोर्ट में देरी, सर्कल ने जताई नाराजगी

Sun, 08 Feb 2026 11:00 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
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पत्र जारी कर उपमंडल-III के सहायक अभियंता से तत्काल रिपोर्ट तलब की
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समय पर बोर्ड की रिपोर्ट नहीं आने से आगे की कार्रवाई हो रही प्रभावित

संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटेड बिलासपुर सर्कल में गठित जांच समिति की रिपोर्ट तय समय में प्रस्तुत न होने पर सर्कल स्तर पर नाराजगी जताई गई है। अधीक्षण अभियंता (ऑपरेशन) सर्कल, एचपीएसईबीएल बिलासपुर ने विद्युत उपमंडल नंबर-III बिलासपुर के सहायक अभियंता को पत्र जारी कर समिति की रिपोर्ट तत्काल प्रभाव से कार्यालय में भेजने के निर्देश दिए हैं।
अधीक्षण अभियंता द्वारा 30 जनवरी 2026 को जारी पत्र में उल्लेख किया गया है कि सर्कल कार्यालय को 12 और 13 जनवरी 2025 को फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति के महासचिव मदन लाल की ओर से पत्र प्राप्त हुए थे। इन पत्रों के संदर्भ में सर्कल कार्यालय की ओर से 20 दिसंबर 2025 को कार्यालय आदेश जारी कर एक जांच समिति का गठन किया गया था। पत्र के अनुसार, समिति को मामले से जुड़े तथ्यों की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करनी थी, लेकिन गठन के काफी समय बाद भी समिति की रिपोर्ट सर्कल कार्यालय को प्राप्त नहीं हुई है। रिपोर्ट के अभाव में प्रकरण में आगे की आवश्यक कार्रवाई नहीं की जा सकी है। इसी कारण अधीक्षण अभियंता ने संबंधित उपमंडल से समिति रिपोर्ट शीघ्र उपलब्ध करवाने को कहा है, ताकि मामले में आवश्यक निर्णय लिया जा सके। इस पत्र की एक प्रति वरिष्ठ अधिशासी अभियंता, विद्युत मंडल घुमारवीं को भी सूचना एवं आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी गई है। इससे यह संकेत मिलता है कि समिति रिपोर्ट में देरी का मामला अब मंडल स्तर तक पहुंच चुका है। गौरतलब है कि समिति रिपोर्ट अब तक प्राप्त न होने की जानकारी सूचना का अधिकार के तहत भी सामने आई है। आरटीआई में दिए गए उत्तर में भी यह स्पष्ट किया गया है कि 20 दिसंबर 2025 को गठित समिति की रिपोर्ट सर्कल कार्यालय को अब तक नहीं मिली है।
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बताया जा रहा है कि यह पूरा प्रकरण कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन परियोजना के तहत मुआवजा आवंटन, मकान के अस्तित्व और विद्युत मीटर की स्थिति से जुड़ा हुआ है। एक ओर विभागीय रिकॉर्ड में मीटर के कभी शिफ्ट न होने की बात कही जा रही है, वहीं शिकायतकर्ता की ओर से मीटर लाइनमैन की सहायता से शिफ्ट करवाने का दावा किया गया है। मुआवजा मिलने के बावजूद मकान के मौके पर मौजूद होने, फोटोग्राफिक साक्ष्यों और विभिन्न विभागों की अलग-अलग रिपोर्टों ने इस मामले को और अधिक जटिल बना दिया है।
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