पंचायत ननावां के तहत गांव बलोह में हो रहे फोरलेन निर्माण को लेकर स्थानीय लोग उग्र हो गए हैं। मंगलवार को ग्रामीणों ने विरोध स्वरूप सड़कों पर उतरकर टोल प्लाजा का काम रोक दिया। ग्रामीणों का आरोप है कि फोरलेन कंपनी बिना निशानदेही के ही उनकी जमीनों पर कब्जा कर रही है।
बेतरतीब ढंग से हो रहे निर्माण से गांव के प्राकृतिक जल स्रोत सूख गए हैं तो वहीं रास्तों को भी बुरी तरह से नुकसान पहुंचा है। मामले की संवेनदशीलता को देखते हुए मौके पर पुलिस बल भी तैनात था। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर उग्र ग्रामीणों को शांत करवाया। इस मौके पर बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे।
पंचायत प्रधान मेहर चंद का कहना है कि उन्होंने कई बार कंपनी के आला अधिकारियों को गांव की समस्याओं से अवगत करवाया। मगर इसके बावजूद इस संदर्भ में आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। कंपनी की लगातार बढ़ रही मनमानी को देखते हुए ग्रामीणों ने प्रदर्शन करने का फैसला लिया।
मंगलवार दोपहर विरोध प्रकट करने के लिए बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण इकट्ठा हुए और उन्होंने टोल प्लाजा का निर्माण कार्य रुकवा दिया। इसको देखते हुए घुमारवीं पुलिस टीम थाना प्रभारी शेर सिंह की अगुवाई में मौके पर पहुंची और स्थिति को काबू किया। पंचायत प्रधान ने कंपनी पर आरोप लगाया कि कंपनी बिना भूमि अधिग्रहण के किसानों की जमीन पर कब्जा कर रही है। इससे गांव के पानी के प्राकृतिक स्रोत सूख चुके हैं जबकि श्मशानघाट के पक्के रास्ते भी पूरी तरह से धवस्त हो चुके हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि टोल प्लाजा का निर्माण गांव बलोह के बीचोबीच किया जा रहा है। लोगों का कहना है कि बैचिंग प्लांट में डाला जाने वाला केमिकल वहां से निकलकर लोगों की फसलों और जमीन को बर्बाद करते हुए सतलुज नदी में फेंका जा रहा है। इससे सतलुज नदी प्रदूषण की चपेट में आ रही है।
कंपनी ने रेत बजरी के ढेर खुले में लगा रखे हैं। ध्वनि प्रदूषण, जल प्रदूषण और पर्यावरण प्रदूषण को भी बढ़ रहा है। सतलुज में अंधाधुंध मलबा फेंका जा रहा है। प्रधान मेहर चंद ने कहा कि कंपनी बिना एनओसी के जहां से भी मन करता है, सड़कें निकाल रही है।
इसके कारण राजकीय प्राथमिक पाठशाला बलोह के भवन के शौचालय तक टूट गए हैं। इससे बच्चों की जिंदगी खतरे में पड़ गई है। यही वजह है कि पूरे निर्माण कार्य में बरती जा रही लापरवाही ने ग्रामीणों को सड़कों पर उतरने पर मजबूर कर दिया है।
मौके पर मौजूद फोरलेन कंपनी के एडमिन विभाग के अधिकारी रघुवीर ने बताया कि अभी उनके आला अधिकारी कोई भी फैसला लेने के लिए मौजूद नहीं है। वहीं लोगों की मांगों और समस्याओं पर कोई फैसला ले सकते हैं। उन्होंने कहा कि अगर 10 जनवरी तक लोगों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो लोग सड़कों पर आने को मजबूर होंगे। इस मौके पर रविकांत, रूपलाल चंदेल, बबलू चंदेल, जागीर सिंह, सोहन सिंह, प्रताप सिंह, विजय सिंह, जोधा सिंह, अरुण, मनोज, तजिंदर, अजय कुमार, अमर सिंह, बलि राम, अंकुर, मान सिंह, रविंद्र कुमार और आशीष कुमार बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।