लहसुन की सिंचाई के चक्कर में प्यासे रह रहे संतरे के पौधे
बोले- गंभरोला खड्ड से नई योजना पर चल रहा काम, खत्म होगा पानी का संकट
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। हिमाचल प्रदेश बागवानी विकास परियोजना को लेकर मजेहड़ क्लस्टर में भ्रम फैलाने की कोशिशों पर उद्यान विभाग ने कड़ी चेतावनी जारी की है। एचपी शिवा के सहायक परियोजना निदेशक डॉ. रमल अंगारिया ने स्पष्ट किया है कि कुछ असामाजिक तत्व और बाहरी लोग, जो स्वयं क्लस्टर के किसान नहीं हैं, मृत व्यक्तियों के नाम पर सफेद झूठ फैलाकर बागवानों को गुमराह कर रहे हैं।
डॉ. रमल अंगारिया ने बताया कि पिछले कई दिनों से एक व्यक्ति के देहांत को लेकर झूठी अफवाह उड़ाई जा रही थी। जांच में पाया गया कि उक्त व्यक्ति का निधन दो साल पहले ही हो चुका था और उसका एचपी शिवा प्रोजेक्ट से कोई लेना-देना नहीं था। उन्होंने कहा कि ऐसे मनगढ़ंत दावे केवल किसानों का मनोबल गिराने और विभाग की छवि खराब करने के लिए किए जा रहे हैं। मजेहड़ निवासी की शिकायत पर संयुक्त निदेशक उद्यान की ओर से की गई जांच में विभाग को क्लीन चिट मिली है। कहा कि क्लस्टर में मौसंबी, ब्लड रेड, जाफा और वैलेंशिया जैसी उन्नत किस्में पूरी तरह वैज्ञानिक मानकों के अनुरूप लगाई गई हैं। इसका पूरा डेटा पोर्टल पर उपलब्ध है। उन्होंने साफ किया कि पड़ोसी राज्यों पंजाब और हरियाणा में भी इन्हीं किस्मों से किसान मालामाल हो रहे हैं। सिंचाई के विवाद पर बड़ा खुलासा करते हुए सहायक परियोजना निदेशक ने कहा कि कुछ किसान सिंचाई के पानी का उपयोग फलदार पौधों के बजाय लहसुन की नकदी फसल में कर रहे हैं। इस कारण संतरे के पौधों को पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा और आपसी विवाद पैदा हो रहा है। उन्होंने बताया कि 20 साल से बंद पड़ी कूहल को विभाग ने पुनर्जीवित किया है और अब गंभरोला खड्ड से नई योजना पर काम चल रहा है, जिससे पानी का संकट पूरी तरह खत्म हो जाएगा। डॉ. अंगारिया ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि साल 2025-26 में प्रदेश के क्लस्टरों से 250 मीट्रिक टन उत्पादन हुआ है। मंडियों में किसानों को बिना किसी अतिरिक्त पैकेजिंग खर्च के 25 से 55 प्रति किलो तक का बेहतरीन दाम मिला है। उन्होंने किसानों से अपील की है कि वे किसी भी बहकावे में न आएं और केवल विशेषज्ञों के परामर्श पर ही भरोसा करें।